Ranchi : पलामू जिले के सोकरा ग्रेफाइट माइंस के मजदूर पिछले 40 साल से अपने हक के लिए लड़ रहे है. नयी आर्थिक नीति आने के बाद सोकरा ग्रेफाइड माइंस को 1982 में बंद कर दिया गया था . माइंस बंद होने के कारण 455 मजदूरों की नौकरी चली गयी और उनका एक करोड़ 27 लाख रुपये अब तक नहीं मिला. इस मामले को लेकर मजदूर लेबर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए और केस जीता, लेकिन मजदूरों की मजदूरी नहीं मिली. मजदूर अपनी समस्या को लेकर बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से भी मिले, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इसे भी पढ़ें--बोकारो:">https://lagatar.in/bokaro-police-arrested-the-accused-of-rape/">बोकारो:
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मिले झारखंड के सभी मुख्यमत्रियों से
झारखंड बनने के बाद मजदूर पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से मिल कर अपनी बात रखी. श्री मरांडी ने मजदूरों को आश्वासन दिया, पर काम नहीं बना. फिर मजदूर अर्जुन मुंडा से मिले. उसके बाद सरकारें बदलती रहीं और नए-नए मुख्यमंत्री आते रहे औऱ मजदूर अपनी बात उनसे कहते रहे. सभी ने काम होने का भरोसा दिया, लेकिन 40 सालों से मजदूर अपनी मजदूरी के के बकाये पैसे की आस में बैठे रहे. इसे भी पढ़ें--BIT">https://lagatar.in/cultivable-land-looted-in-the-name-of-bit-mesra-ranchi-dc-provided-force-and-jcb-lobin-hembrom/">BITमेसरा के नाम पर खेती योग्य जमीन की लूट, रांची डीसी ने उपलब्ध कराया फोर्स और जेसीबी: लोबिन हेम्ब्रोम
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