Ranchi : एसीबी में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक गणेश कुमार सिंह की पत्नी ने विस अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपने पति को निलंबन मुक्त करने और स्थानांतरित इकाई झारखंड जगुआर में योगदान के लिए विरमित करने की मांग की है. पत्र में उन्होंने पति के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट (आईआर) दर्ज होने और लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित होने से परिवार के मानसिक तनाव में होने की बात कही है.
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पहले झारखंड जगुआर में पदस्थापित थे गणेश सिंह
पुलिस निरीक्षक गणेश कुमार सिंह पूर्व में झारखंड जगुआर में पदस्थापित थे. पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के एसीबी के महानिदेशक का प्रभार संभालने के बाद गणेश सिंह को एसीबी में लाया गया था. बाद में उन्हें पुलिस मुख्यालय की एनजीओ शाखा का प्रभारी बनाया गया. यह शाखा आमतौर पर डीएसपी स्तर के पदाधिकारी के जिम्मे रहती है, लेकिन गणेश सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्त होने के बाद गणेश सिंह को एनजीओ प्रभारी के पद से हटा दिया गया और उन्हें वापस झारखंड जगुआर भेजने का आदेश जारी किया गया था. तदाशा मिश्रा के प्रभारी डीजीपी बनने के बाद इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह को अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय की एनजीओ शाखा का प्रभारी बनाया गया.
अवैध वसूली के आरोप में एसीबी ने दर्ज की है आईआर
गणेश सिंह के खिलाफ एसीबी में अवैध वसूली के आरोपों को लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज की गई है. आरोप है कि पुलिस मुख्यालय की एनजीओ शाखा में पदस्थापना के दौरान विभिन्न फाइलों के निष्पादन के बदले अवैध वसूली की गई. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा अवैध वसूली से चल-अचल संपत्ति अर्जित की गई.
वहीं, हाईकोर्ट में दाखिल एक मामले के पूरक शपथ पत्र में भी गणेश सिंह पर धनबाद के एक व्यवसायी से वसूली का आरोप लगाए जाने का उल्लेख किया गया है. शिकायत में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल के दौरान धनबाद क्षेत्र के कोयला कारोबारियों से वसूली का भी आरोप लगाया गया है. इस मामले को लेकर एसीबी ने आईआर दर्ज कर जांच शुरू की है.
पत्नी ने कहा- मानसिक तनाव में हैं पति
विधानसभा अध्यक्ष को दिए पत्र में गणेश सिंह की पत्नी ने कहा है कि उनके पति का पुलिस मुख्यालय के आदेश के तहत एसीबी रांची से झारखंड जगुआर में स्थानांतरण किया गया था, लेकिन उन्हें एसीबी से विरमित नहीं किया गया. इसी दौरान पत्नी की बीमारी और बाद में स्वयं गणेश सिंह के बीमार होने का हवाला देते हुए 60 दिनों के उपार्जित अवकाश के लिए आवेदन दिया गया था.
आरोप है कि अवकाश स्वीकृत करने के बजाय उन्हें एसीबी के हजारीबाग प्रमंडलीय कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर दिया गया और बाद में विभागीय आदेश के तहत निलंबित कर दिया गया.
पत्नी ने पत्र में दावा किया है कि लगातार मीडिया में आईआर और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की खबरें प्रकाशित होने के कारण उनके पति मानसिक तनाव में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कनीय पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते उनके पति के खिलाफ आधारहीन शिकायतें कराई गईं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
उन्होंने कहा है कि उनके पति ने 31 वर्षों की सेवा अवधि में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से काम किया है. परिवार के मानसिक तनाव में होने और किसी अप्रिय घटना की आशंका जताते हुए पत्नी ने विधानसभा अध्यक्ष से मामले में हस्तक्षेप कर गणेश कुमार सिंह को निलंबन मुक्त करने और एसीबी से विरमित कर झारखंड जगुआर भेजने की मांग की है.
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