Ranchi: रांची कृषि कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों का दो दिवसीय द्विवार्षिक मिलन समारोह शनिवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) परिसर में शुरू हुआ. समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 150 से अधिक पूर्व छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने पुराने दिनों की यादें ताजा कीं.
समारोह को संबोधित करते हुए बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने कहा कि पूर्व छात्र किसी भी संस्थान के सच्चे राजदूत होते हैं. उन्होंने कहा कि सतत कृषि पद्धतियों को आगे बढ़ाने, कृषि-व्यवसाय का नेतृत्व करने, अनुसंधान एवं नवाचार में योगदान देने और किसानों की सेवा करने में पूर्व छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. उनकी उपलब्धियां संस्थान के मूल्यों और उत्कृष्टता को दर्शाती हैं.
कुलपति ने सुझाव दिया कि कॉलेज-वार पूर्व छात्र संघ के बजाय बीएयू के सभी कॉलेजों के पूर्व छात्रों का एक संयुक्त संगठन बनाया जाए, जिससे संपर्क और सहयोग को और मजबूती मिल सके. उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूर्व छात्र संघ को हरसंभव सहयोग देगा. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अलूमनाइ वेबसाइट को वर्ष भर सक्रिय और संवादात्मक रखा जाए और उसमें सभी सदस्यों के संपर्क विवरण उपलब्ध हों.
डॉ. दुबे ने कहा कि आज कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और बदलती बाजार मांग जैसी चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में नवाचार, प्रौद्योगिकी और समावेशिता के साथ नेतृत्व की आवश्यकता है. उन्होंने पूर्व छात्रों से आग्रह किया कि वे भविष्य के लिए तैयार स्नातकों के निर्माण और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं.
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व विद्यार्थी संघ की अध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती और कृषि संकाय के डीन डॉ. डी.के. शाही के स्वागत भाषण से हुई. सचिव डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.
इस अवसर पर खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर के 28 विद्यार्थियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए. ये पुरस्कार वरिष्ठ पूर्व छात्रों द्वारा प्रायोजित थे.
समारोह में झारखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीलिमा केरकेट्टा, सेवानिवृत्त संयुक्त आयुक्त (कस्टम) डॉ. हेमंत तातिया, बैंकिंग, कृषि अनुसंधान, उद्यमिता और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई विशिष्ट पूर्व छात्र उपस्थित रहे.
संवाद सत्र के दौरान पूर्व छात्रों ने कृषि अनुसंधान, कृषि-व्यवसाय प्रबंधन, ग्रामीण विकास और सतत कृषि पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने प्रिसिजन एग्रीकल्चर, जैविक खेती और कृषि-उद्यमिता में नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान छात्रों को उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. पूर्व छात्रों ने अपने पुराने कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों और अनुसंधान फार्म का भी दौरा किया और संस्थान से जुड़ी यादों को साझा किया.
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