और दलितों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण : पीएम
"पेसा-वन अधिकार कानून को लेकर राष्ट्रपति से उम्मीद"
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान देश के नागरिकों का न केवल अधिकार, स्वतंत्रता और कर्तव्य को निर्देशित करता है, बल्कि लोकतंत्र के बुनियाद को भी मजबूत करता है. संविधान की पांचवी अनुसूची आदिवासियों के पारम्परिक रीति रिवाज, संस्कृति, सभ्यता और पहचान को बनाए रखने की गारंटी देता है. आदिवासी समुदाय के हित में संसद ने 1996 में पेसा कानून बनाया. एक लंबे संघर्ष के बाद 2006 में वन अधिकार कानून बना. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से हमें इन दो कानूनों को लेकर ज्यादा उम्मीद है.कई सालों से सरना धर्म कोड की मांग-सुप्रियो
सुप्रियो ने कहा, "आदिवासी समुदाय की पिछले कई वर्षों से सरना धर्म कोड की मांग रही है. यह कोड आदिवासियों की पहचान, धर्म को मजबूत करता है. झामुमो ने विधानसभा में इसपर सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पास किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें कांग्रेस, आरजेडी, वामदल भाजपा और आजसू शामिल थे) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन भी सौंपा. झामुमो की मांग है कि सर्वोच्च पद पर बैठने वाली पहली जनजातीय महिला जनसंख्या कॉलम में सरना धर्म कोड को शामिल करने की घोषणा करें." इसे भी पढ़ें-अब">https://lagatar.in/now-108-ambulances-will-be-booked-from-the-jeevandoot-app-the-scheme-is-proving-to-be-a-boon/">अबजीवनदूत एप से बुक होगी 108 एंबुलेंस, वरदान साबित हो रही योजना

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