Ranchi : झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बांस आधारित उद्योग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार का मजबूत आधार बन सकते हैं. यदि नीति, तकनीक, वित्तीय सहयोग, डिजाइन, प्रसंस्करण और बाजार का प्रभावी समन्वय किया जाए तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश का अग्रणी बांस उत्पादक एवं बांस आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
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मंत्री शुक्रवार को रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस (XISS) में आयोजित Bamboo Ecosystem Conclave 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं. नेटवर्क फॉर एंटरप्राइज एन्हांसमेंट एंड डेवलपमेंट सपोर्ट (NEEDS) द्वारा यूरोपीय संघ समर्थित SWASHAKT परियोजना के तहत आयोजित इस सम्मेलन में बांस आधारित औद्योगिक विकास, ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास पर नीति संवाद आयोजित किया गया.
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में उद्योग, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में झारखंड के विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य की खनिज संपदा के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन झारखंड की सबसे बड़ी पूंजी हैं, जिनका संरक्षण करते हुए रोजगार, निवेश और सतत विकास के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं.
उन्होंने बिरसा हरित ग्राम योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत उत्पादित झारखंड के आम इस वर्ष दुबई, इटली और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे हैं. यह किसानों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की मेहनत का परिणाम है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस योजना ने किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है, उसी प्रकार बांस आधारित आजीविका भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है.
सम्मेलन में बांस आधारित औद्योगिक नीति, ग्रामीण आजीविका एवं उद्यमिता, विभागीय समन्वय, स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित बांस उद्यम, निवेश, मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार, उद्योग, नीति-निर्माताओं, विकास साझेदारों और विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित कर झारखंड में बांस आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना था.
इस अवसर पर एक्सआईएसएस के अनंत कुमार, नीड्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुरारी एम. चौधरी, संजीव कार्पे, डॉ. मनोज सहित कई लोग उपस्थित थे.
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