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रांची: डाक विभाग की लापरवाही, 1 साल तक अटकी रही ग्रामीणों की डाक; डाकिया के घर से दस्तावेजों के बोरे बरामद

झारखंड की राजधानी रांची की खबरें

Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के कांके प्रखंड स्थित पिठोरिया पोस्ट ऑफिस से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां के निवासियों को पिछले एक साल से कोई भी डाक नहीं मिली थी. जब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने हंगामा किया, तब जाकर विभाग की पोल खुली.


डाकिया के घर में छिपाया गया था दस्तावेजों का जखीरा

मामले के तूल पकड़ने के बाद जब डाक विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने जांच शुरू की, तो जो सच्चाई सामने आई उसने सभी को स्तब्ध कर दिया. आरोपी डाकिया के घर की तलाशी लेने पर कई बोरों में ठूंस-ठूंस कर भरी गई डाक बरामद हुई. इन बोरों में आम जनता के [Aadhaar Redacted], पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक के अलावा लोक अदालत और आयकर विभाग (Income Tax) के बेहद संवेदनशील नोटिस भी शामिल थे.

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महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद


जनता को उठाना पड़ा बड़ा नुकसान

ग्रामीणों का कहना है कि समय पर डाक न मिलने के कारण उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा. कई लोगों के जरूरी सरकारी दस्तावेज समय पर न पहुंचने से उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका, वहीं आयकर विभाग के नोटिस समय पर न मिलने से ग्रामीणों को कानूनी और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.


इंस्पेक्टर ने दिए कार्रवाई के संकेत, शुरू होगा 'स्पेशल ड्राइव'

घटना की गंभीरता को देखते हुए पोस्ट ऑफिस इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित डाकिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इस लापरवाही के लिए जो भी अन्य जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी होंगे, उन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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डाकिया के घर की ली गई तलाशी

विभाग की ओर से अब एक 'स्पेशल ड्राइव' चलाने की घोषणा की गई है. इसके तहत अटके हुए सभी दस्तावेजों और चिट्ठियों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर लाभार्थियों के घर तक पहुंचाया जाएगा.


सरकारी तंत्र पर उठे सवाल

यह घटना सरकारी व्यवस्था की उस लचर कार्यप्रणाली को दर्शाती है, जहां एक कर्मचारी की लापरवाही सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन पर भारी पड़ती है. क्या मात्र निलंबन से ग्रामीणों का नुकसान भरपाई हो पाएगा? यह सवाल अब भी कांके के निवासियों की जुबान पर है. अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या विभाग सच में पीड़ितों को उनके दस्तावेज समय पर लौटा पाता है.

 

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