Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

रांची : अल्बर्ट एक्का चौक पर मंच टूटने के बाद भी मेजबानी का नहीं टूटा हौसला, शोभायात्रा संपन्न

राज्य भर में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया. हालांकि इस बीच मौसम ने शोभायात्रा में खलल डाली. इसके बावजूद राज्यवासियों में जोश चरम पर था. बारिश में भी शहर वासी खूब झूमे और सरहुल पर्व धूमधाम से मनाएं.
Advertisement
Advertisement

Ranchi : राज्य भर में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया. हालांकि इस बीच मौसम ने शोभायात्रा में खलल डाली. इसके बावजूद राज्यवासियों में जोश चरम पर था. बारिश में भी शहर वासी खूब झूमे और सरहुल पर्व धूमधाम से मनाएं. 

 

शोभा यात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह मंच बनाए गए थे. खराब मौसम और बारिश के कारण अल्बर्ट एक्का चौक के पास एक स्वागत मंच अचानक भर भराकर गिर गया. जिसमें आधा दर्जन लोगों को चोटें लगी. इसके बावजूद मेजबानी में कोई कमी नहीं दिखी.

 

चौंकाने वाली बात यह रही कि इस हादसे के चंद मिनटों बाद ही लोगों का उत्साह फिर से चरम पर था. मांदर की थाप पर थिरकते युवक-युवतियों और जय सरना के उद्घोष ने माहौल को फिर से भक्तिमय बना दिया. लोगों ने इस घटना को पीछे छोड़ते हुए अपनी यात्रा जारी रखी, जो उनकी गहरी सांस्कृतिक निष्ठा को दर्शाता है.

 

मंच पर बैठे लोगों ने स्वागत के लिए मंगाई गई मिठाइयां शोभायात्रा में शामिल लोगों को बांटने लगे. सभी लोग खुशी से सरहुल पर्व मनाया और एक दूसरे को बधाइयां दी. आपको बता दें कि संवेदनशील इलाकों और भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. पूरी शोभा यात्रा की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही थी. मुख्य मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए उपद्रवियों पर नजर रखी गई.

 

पुलिस बल की तैनाती

सरहुल पर्व में दो हजार अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई थी. संवेदनशील जगहों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सादे लिबास में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. वहीं शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कई मार्गों को डायवर्ट किया गया था और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी.

 

सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

शोभा यात्रा में केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. विभिन्न संगठनों द्वारा शरबत, पानी और फल वितरित कर एकता की मिसाल पेश की गई. मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी सरना स्थल पहुंचकर प्रदेश की खुशहाली और सुख-शांति की कामना की.

 

शाम ढलते-ढलते पूरी राजधानी मांदर और नगाड़ों की गूंज से सराबोर रही. मंच टूटने जैसी छोटी बाधाओं के बावजूद, सरहुल की इस शोभा यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रकृति प्रेम और सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों का समर्पण अटूट है.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही