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बड़े निवेश, IT और नई नौकरियां... हेमंत सोरेन के झारखंड में रांची की बदली पहचान, LinkedIn में 8वां स्थान

Ranchi News : रांची की इस बदलती तस्वीर को झारखंड सरकार की हाल की निवेश नीति और उद्योगों को आकर्षित करने की कोशिशों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य को पारंपरिक खनन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे ले जाकर निवेश, वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग, IT, पर्यटन, ऊर्जा और नए उद्योगों की तरफ ले जाने पर जोर दिया है.
 
प्रतीकात्मक चित्र

Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची अब सिर्फ सरकारी कामकाज और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले शहर की छवि से बाहर निकल रही है. नौकरी, कारोबार, IT, बैंकिंग, शिक्षा और नए निवेश के मामले में रांची तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसका एक संकेत LinkedIn की Cities on the Rise 2026 रिपोर्ट में मिला है. रिपोर्ट में रांची को देश के तेजी से उभरते गैर-मेट्रो शहरों में 8वां स्थान मिला है.

 

LinkedIn ने देश के 10 ऐसे शहरों की पहचान की है, जहां रोजगार और प्रोफेशनल गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. इस सूची में विशाखापट्टनम पहले, रांची दूसरे नंबर पर नहीं बल्कि 8वें स्थान पर है. सूची में विजयवाड़ा, नासिक, रायपुर, राजकोट, ग्वालियर, आगरा, जम्मू और वाराणसी जैसे शहर भी शामिल हैं.

 

रिपोर्ट का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि लंबे समय तक भारत में बड़े रोजगार केंद्रों का मतलब दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे महानगर रहे हैं. अब कंपनियां और प्रोफेशनल्स छोटे और गैर-मेट्रो शहरों की तरफ भी देख रहे हैं. LinkedIn के आंकड़े इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं.

 

रांची के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रैंकिंग

रांची की अर्थव्यवस्था लंबे समय से सरकारी संस्थानों, खनन और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों पर निर्भर रही है. लेकिन अब शहर के रोजगार बाजार में बैंकिंग, IT Services, IT Consulting, Higher Education, Retail और दूसरे सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ रही है.

 

LinkedIn के अनुसार रांची में Credit Intermediation, IT Services and IT Consulting और Higher Education प्रमुख hiring sectors में शामिल हैं. Concentrix और Reliance Retail जैसे बड़े नियोक्ता भी शहर के रोजगार बाजार में मौजूद हैं.

 

इस बदलाव का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि झारखंड के युवाओं को नौकरी के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर जाने की जरूरत कुछ हद तक कम हो.

 

हेमंत सोरेन सरकार की भूमिका कहां दिखती है

रांची की इस बदलती तस्वीर को झारखंड सरकार की हाल की निवेश नीति और उद्योगों को आकर्षित करने की कोशिशों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य को पारंपरिक खनन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे ले जाकर निवेश, वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग, IT, पर्यटन, ऊर्जा और नए उद्योगों की तरफ ले जाने पर जोर दिया है.

 

2026 में पहली बार हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के लिए दावोस गया. वहां राज्य ने निवेशकों के सामने अपनी औद्योगिक क्षमता और नए आर्थिक मॉडल को रखा. सरकार ने निवेश को केवल खनन तक सीमित रखने के बजाय नए क्षेत्रों में विस्तार पर जोर दिया. 

 

दावोस में सरकार ने पूंजी के बेहतर इस्तेमाल, वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार पैदा करने की रणनीति पर जोर दिया. इसका उद्देश्य झारखंड की अर्थव्यवस्था को केवल खनिजों पर निर्भर रहने से आगे ले जाना है. 

 

70 हजार करोड़ का जिंदल निवेश

रांची और झारखंड के लिए सबसे बड़े निवेश प्रस्तावों में जिंदल समूह का करीब 70,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शामिल है. इस निवेश में स्टील, न्यूक्लियर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्र शामिल हैं. जिंदल स्टील ने झारखंड सरकार के साथ इस निवेश को लेकर समझौता किया है. 

 

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पूरा 70,000 करोड़ रुपये का निवेश रांची शहर में नहीं होगा. इसका बड़ा हिस्सा राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रस्तावित है. लेकिन बड़े उद्योगों का विस्तार रांची जैसे राजधानी शहर को प्रशासनिक, वित्तीय, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और प्रोफेशनल हब के रूप में फायदा पहुंचा सकता है.

 

टाटा स्टील का 11 हजार करोड़ का निवेश

टाटा स्टील ने भी झारखंड में 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के लिए राज्य सरकार के साथ समझौता किया है. इसका फोकस ग्रीन स्टील और नई तकनीक पर है. इससे राज्य में आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है. 

 

यह निवेश भी सीधे रांची शहर तक सीमित नहीं है. लेकिन झारखंड में बड़े औद्योगिक निवेश बढ़ने का असर राजधानी के सर्विस सेक्टर पर पड़ सकता है.

 

सरकार का फोकस अब सिर्फ स्टील और कोयले तक नहीं

हेमंत सोरेन सरकार की निवेश रणनीति में IT, AI, डिजिटल गवर्नेंस, रिसर्च, पर्यटन और नई तकनीक को भी शामिल किया जा रहा है. जुलाई 2026 में राज्य सरकार ने कई कंपनियों और संस्थानों के साथ करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से जुड़े 14 MoU किए. इनमें उद्योग, तकनीक, AI, रिसर्च और डिजिटल क्षेत्र शामिल हैं. 

 

इससे रांची को एक अलग तरह का फायदा मिल सकता है. अगर राज्य में नए उद्योग और टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियां आती हैं, तो राजधानी में उनके कॉरपोरेट ऑफिस, सर्विस सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, बैंकिंग और अन्य सपोर्ट सिस्टम विकसित हो सकते हैं.

 

2 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगा कनेक्टिविटी नेटवर्क

नौकरी और निवेश के लिए सिर्फ कंपनियां पर्याप्त नहीं होतीं. सड़क, बिजली, इंटरनेट, एयर कनेक्टिविटी, सार्वजनिक परिवहन और बेहतर शहरी सुविधाएं भी जरूरी हैं.

 

रांची और आसपास के क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश इसी वजह से महत्वपूर्ण है. बेहतर कनेक्टिविटी से रांची को पतरातू, रामगढ़ और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने में मदद मिल सकती है. इसका सीधा असर निर्माण, ट्रांसपोर्ट, होटल, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और छोटे कारोबार पर पड़ सकता है.

 

युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल - कितनी नौकरियां आएंगी

LinkedIn की रैंकिंग रांची के रोजगार बाजार में तेजी का संकेत देती है, लेकिन असली चुनौती अब आगे है. निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना और उनसे स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाना सबसे महत्वपूर्ण होगा.

 

बड़े निवेश आने के साथ इंजीनियरिंग, IT, Finance, अकाउंटिंग, HR, लॉजिस्टिक्स, निर्माण, मशीन ऑपरेशन, हेल्थकेयर और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है. इसके लिए स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय युवाओं की ट्रेनिंग पर जोर देना जरूरी होगा. 

 

रांची के लिए अगली चुनौती

LinkedIn की 8वीं रैंकिंग रांची के लिए निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है. लेकिन इसे स्थायी बदलाव में बदलने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को कई मोर्चों पर काम करना होगा.

 

अगर बड़े निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और IT, बैंकिंग, शिक्षा तथा सर्विस सेक्टर का विस्तार जारी रहता है, तो रांची आने वाले वर्षों में झारखंड का सबसे बड़ा employment और services hub बन सकता है. इस लिहाज से LinkedIn की 2026 की रैंकिंग को रांची की बदलती अर्थव्यवस्था का शुरुआती संकेत माना जा सकता है.

 

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