Ranchi : समृद्ध आदिवासी संस्कृति, कला, परंपरा और विरासत को देश-दुनिया के सामने रखने वाला झारखंड आदिवासी महोत्सव सोमवार को रंगारंग माहौल में संपन्न हुआ. महोत्सव में झारखंड की लोक परंपराओं से लेकर जनजातीय कला, शिल्प, व्यंजन और आधुनिक तकनीक की झलक देखने को मिली.
महोत्सव के थीमैटिक प्रदर्शनी हॉल में झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया. यहां ढोल, नगाड़ा, मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों ने लोगों का ध्यान खींचा. वहीं, संकल्प दीवार लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही. यहां बड़ी संख्या में लोग तस्वीरें लेते नजर आए. प्रदर्शनी में एआई चैटबॉट के माध्यम से भी झारखंड की आदिवासी संस्कृति को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रस्तुत किया गया. इसमें आदिवासी परिधान पहने महिला और हाथ में टोकरी लिए हरियाली से जुड़ी झलक दिखाई गई.
शहीदों और महापुरुषों की दिखी झलक
महोत्सव में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की भव्य प्रतिमा के साथ झारखंड के अमर शहीदों के कटआउट भी प्रदर्शित किए गए. वहीं, धरती आबा बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा के माध्यम से उनके प्रारंभिक जीवन, जनजागरण, संगठन, आंदोलन, संघर्ष और वीरगति की कहानी को दर्शाया गया.
जीआई टैग वाली कला और शिल्प बने आकर्षण
प्रदर्शनी में झारखंड की जीआई टैग प्राप्त कला और शिल्प को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया. इसमें सोहराय चित्रकला, जादोपटिया और कोहबर चित्रकला की प्रदर्शनी लगाई गई. इसके अलावा बांस शिल्प, मुंडा आभूषण और डोकरा कला को भी प्रदर्शित किया गया.
महोत्सव में झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए. यहां ‘बोलना ही संगीत और चलना ही नृत्य की भावना के साथ जनजातीय जीवन और परंपराओं की झलक देखने को मिली.
जनजातीय व्यंजनों ने भी बटोरी वाहवाही
महोत्सव में झारखंडी व्यंजनों का भी खास तड़का देखने को मिला. जनजातीय फूड स्टॉल, सिप एंड चिल और फूड स्टॉल पर लोगों ने स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया. यहां धुसका, गुलगुला, मड़ुआ लड्डू, छिलका रोटी, डुम्बू समेत कई पारंपरिक आदिवासी व्यंजन परोसे गए. झारखंड आदिवासी महोत्सव के समापन के साथ ही राजधानी में कई दिनों तक चली संस्कृति, कला, परंपरा और जनजातीय जीवन की यह रंगीन झलक समाप्त हो गई.

फूड स्टॉल लगाए गए
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