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रांचीः JSIRC के आदेशपाल से मेंबर कराते थे घर पर नौकर वाले काम, पत्नी संग बैठे धरने पर

लगाया आरोप : एक साल से नहीं मिल रहा है वेतन, बच्चे तक जूता साफ कराते थे

Ranchi: झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के आदेशपाल भागीरथ महतो अपनी पत्नी के साथ आयोग के कार्यालय के समक्ष धरना पर बैठ गये हैं. उनका आरोप है कि उन्हें कार्यालय में न रखकर सदस्य विधि महेंद्र प्रसाद के घर में काम करने के लिए भेजा गया. उनसे जूठा साफ कराया गया. जूतों की पॉलिश तक कराई जाती थी, पर जब वेतन की देने की बारी आयी तो आयोग ने हाथ खड़े कर दिये. पिछले एक वर्ष से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है. बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई है. जिसके कारण विवश होकर वह अपनी पत्नी के साथ धरना पर बैठे हैं. इसे पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-opposition-to-the-construction-of-basketball-and-volleyball-court-in-the-conch-field-of-sidgora-sun-temple-mla-saryu-rai-accused-of-ruining-beautiful-places/">जमशेदपुर

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भगीरथ ने बताया कि आयोग गठन के बाद वर्ष 2003 से वह यहां कार्यरत हैं. उन्हें विद्युत लोकपाल कार्यालय में पदस्थापित किया गया था. जहां आदेशपाल के रूप में वह कार्यरत थे. जब विद्युत लोकपाल नहीं थे तब जुलाई 2022 से उन्हें आयोग के सचिव राजेंद्र प्रसाद ने बिना कार्यालय के आदेश के सदस्य विधि के घर काम के लिए भेज दिया. जबकि मैं मना करता रहा तो वह कहते थे कि दो-तीन महीना मैनेज करो. मुझसे वहां जूठा बर्तन धोना, झाड़ू-पोछा, महेंद्र प्रसाद के पोते का डाइपर फेंकना, जूता पॉलिश, कपड़ा धोने जैसे काम कराया जाता रहा. मैं काम वहां करता था पर मेरी हाजिरी लोकपाल कार्यालय में बनती थी. 24 फरवरी 2023 को जब लोकपाल आ गये तो मुझे हाजिरी बनाने से रोक दिया गया. मेरी हाजिरी बननी बंद हो गयी और मुझे वेतन देना बंद कर दिया गया. लोकपाल कहते थे कि कार्यालय में आने वाले को ही वेतन दिया जाएगा. उनकी हाजिरी में अनुपस्थिति दर्ज होती गई. तब से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है. मजबूर होकर धरना पर बैठे हैं.

आयोग का पक्ष

आयोग के सचिव राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सदस्यों को डोमेस्टिक हेल्पर देने का प्रावधान है. इसी के तहत भागीरथ महतो को भेजा गया था. आयोग जल्द ही इस मामले में फैसला लेगा. इसे भी पढ़ें- हेमंत">https://lagatar.in/basant-soren-met-hemant-in-jail-talked-about-elections-and-party-organization/">हेमंत

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बिना बताए महीनों गायब हो जाता था कर्मी

आयोग के सचिव राजेंद्र नायक ने बताया कि भागीरथ महतो अनुसेवक के रूप में कार्यरत था. वह प्राय: बिना बताए ही महीनों तक गायब हो जाता था. ऐसा पूर्व में दो-दो बार हो चुका है. फिर माफीनामा लिखवाकर उन्हें काम पर रखा गया. लेकिन अब तीसरी बार उन्होंने खुद ही कार्यालय आना छोड़ दिया और अब पुन: काम पर रखने की मांग कर रहे हैं. तीसरी बार ऐसा किये जाने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. उनके धरने और आत्मदाह की चेतावनी को लेकर रांची डीसी और अरगोड़ा थाने को सूचना दे दी गई है. [wpse_comments_template]

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