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रांची : खोरठा दिवस श्रीनिवास पानूरी के अतुलनीय योगदान की याद दिलाता है- अवध बिहारी

  • मारवाड़ी कॉलेज में खोरठा दिवस और श्रीनिवास पानूरी जयंती मनाई गई

Ranchi : मारवाड़ी महाविद्यालय, रांची में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (खोरठा) विभाग द्वारा “खोरठा दिवस/श्रीनिवास पानूरी जयंती सह एकदिवसीय संगोष्ठी” का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के जे.सी. बोस सभागार में हुआ.

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खोरठा भाषाविद डॉ. विनोद कुमार (समन्वयक, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग सह विभागाध्यक्ष, खोरठा भाषा विभाग, DSPMU) रहे.

 

विशिष्ट अतिथियों में मेजर डॉ. माहेश्वर सारंगी, डॉ. अरविंद कुमार साव, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. निरंजन कुमार, डॉ. राजेंद्र कुमार महतो एवं महादेव प्रसाद सहित कई खोरठा विद्वान एवं शिक्षाविद उपस्थित थे.

 

अतिथियों का स्वागत खोरठा भाषा विभाग के सहायक प्राध्यापक सह एएनओ (एनसीसी) लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार के नेतृत्व में हुआ.

 

स्वागत में छात्र-छात्राओं द्वारा मांदर-नगाड़े की थाप, तिलक एवं पुष्पवर्षा के साथ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत श्रीनिवास पानूरी जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई.

 

स्वागत भाषण में लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो ने कहा कि खोरठा दिवस श्रीनिवास पानूरी जी के अतुलनीय योगदान की याद दिलाता है. उन्होंने खोरठा साहित्य की रचना के साथ-साथ भाषा को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य किया.

 

इस अवसर पर उन्होंने क्रिसमस डे, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, तुलसी पूजन एवं झारखंड आंदोलनकारी शहीद निर्मल महतो को भी स्मरण किया. इसके पश्चात अतिथियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया.

 

मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीनिवास पानूरी जी का खोरठा भाषा के विकास में योगदान अविस्मरणीय है. संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद उन्होंने खोरठा साहित्य को समृद्ध किया और समाज को प्रेरणा दी. उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा में साहित्य सृजन करने का आह्वान किया.

 

अन्य वक्ताओं ने भी मातृभाषा पर गर्व करने, खोरठा भाषा के संरक्षण-संवर्धन, नियमित विचार-मंथन, आईटी एवं एआई से जोड़कर भाषा के विकास तथा रोजगार सृजन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि खोरठा झारखंड की द्वितीय राजभाषा बन चुकी है और इसके प्रचार-प्रसार से सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी.

 

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार ने किया. इस अवसर पर भुवनेश्वरदत शर्मा ‘व्याकुल’ साहित्य सेवा सम्मान की शुरुआत की घोषणा की गई तथा वर्ष 2025 के लिए यह सम्मान डॉ. विनोद कुमार को प्रदान किए जाने की घोषणा हुई.

 

कार्यक्रम में एनसीसी कैडेटों, स्नातक-परास्नातक छात्रों एवं शोधार्थियों ने खोरठा भाषा में अपने विचार व्यक्त किए. सन्नी कुमार विश्वकर्मा, धर्मेंद्र कुमार एवं लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो द्वारा खोरठा भाषा पर आधारित गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया.

 

अंत में लेफ्टिनेंट डॉ. अवध बिहारी महतो ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों, प्राचार्य, महाविद्यालय परिवार, मीडियाकर्मियों, एनसीसी कैडेटों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में एनसीसी के सीनियर एवं अंडर ऑफिसर्स तथा कैडेटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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