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रांची : 15 बच्चों से शुरू हुई थी मदरसा अनवार उलूम कासमिया, आज 300 बच्चे ले रहे तालीम

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एस्बेस्टस के एक कमरे से हुआ था शुरू, आज दो मंजिला इमारत

Ranchi : हाफिज नजीर अहमद ने शिक्षा की अहमत पर गौर फरमाते हुए हिंदपीढ़ी नेजाम नगर में मदरसा अनवार उलूम कासमिया की स्थापना के लिए 1998 में जमीन ली, जहां आरंभ में एस्बेस्टस से बने एक कमरे में महज 15 बच्चों से मदरसे की शुरुआत की गई. फिर मदरसे की संग ए बुनिया 1991 में रखी गयी. इस अवसर पर इमारत ए शरिया बिहार ओडिशा के अमीर ए शरीयत मौलाना अब्दुल्लाह रहमान कासमी, मौलाना मोजाहिद इस्लाम, मौलाना सैयद नेजामुद्दीन कासमी, इमारत ए शरिया समेत बड़ी संख्या में उलेमा एवं बुद्धिजीवी शरीक हुए. मदरसा के वरीय शिक्षक मौलाना मो. शौकत ने बताया कि मदरसे को स्थापित करने वाले हाफिज नजीर अहमद का निधन हो गया है. अब उनके बेटे हाफिज शाद अहमद प्राचार्या की भूमिका निभा रहे हैं. आज मदरसा दो मंजिला बन कर तैयार हो गया है. इस समय यहां 300 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इन बच्चों के लिये सात शिक्षक सेवा दे रहे हैं. शिक्षक बच्चों को कुरआन की शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल की शिक्षा भी दे रहे हैं. बच्चों के लिए हॉस्टल का प्रबंध भी है. यहां बच्चों से 100 रुपये मासिक शुल्क एवं हॉस्टल के बच्चों से 500 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता है. हॉस्टल के बच्चों को तीनों वक्त का खाना व रहने के साथ पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इस समय यहां बिहार के गया, चतरा, हजारीबाग, लोहरदगा, इरबा, नगड़ी समेत रांची व आसपास के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. यहां बच्चों को आठवीं (वस्तानिया), मैट्रिक (फौकानिया), इंटर (मौलवी), बीए (आलिम), एमए (फाजिल) की शिक्षा के लिए रांची के मदरसा इ्स्लामिया से फार्म भरवाया जाता है. इस तरह बच्चे इन डिग्रियों को हासिल कर रहे हैं. आज यहां के पढ़े बच्चे कई मदरसों व स्कूलों में शिक्षक हैं. मस्जिदों में इमामत कर रहे तथा इंजीनियरिंग, बैंक, निजी कार्यालयों आदि में भी अपनी सेवा दे रहे हैं. इसे भी पढ़ें : DSP">https://lagatar.in/dsp-sajid-zafar-raised-questions-on-posting-wrote-on-facebook-i-have-decided-to-resign-from-the-job/">DSP

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