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रांचीः हैबिटेशन मैपिंग में लापरवाही, 804 विद्यालयों के हेडमास्टर पर कार्रवाई तय

Ranchi: समग्र शिक्षा के तहत आगामी बजट और वार्षिक कार्य योजना के निर्माण से पहले कराई जा रही हैबिटेशन मैपिंग में लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य के 804 सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों द्वारा निर्धारित समयसीमा तक हैबिटेशन मैपिंग का कार्य पूरा नहीं किए जाने पर संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जा रही है. 


इन सभी विद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 96.6 प्रतिशत विद्यालयों ने लक्ष्य के अनुरूप हैबिटेशन मैपिंग का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि शेष विद्यालयों की लापरवाही पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है.

 

इसी क्रम में राज्य में 11 दिसंबर 2025 से शुरू हुए शिशु पंजी सर्वे की समयसीमा का विस्तार करते हुए इसे अब 15 फरवरी 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है. अब तक 19,060 विद्यालयों ने शिशु पंजी सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है, जो कुल लक्ष्य का 55.4 प्रतिशत है. वहीं 12,253 विद्यालयों में सर्वे कार्य जारी है, जबकि 3,065 विद्यालयों ने अब तक सर्वे शुरू नहीं किया है. विभाग ने सभी स्कूलों को मिशन मोड में कार्य करते हुए तय समयसीमा के भीतर सर्वे पूरा करने का निर्देश दिया है.

 

पहली बार DAHAR 2.0 पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से कराए जा रहे शिशु पंजी सर्वे के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक बताए जा रहे हैं. अब तक 24,140 आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की जा चुकी है. इनमें बाल मजदूरी में लगे बच्चे, अनाथ या एकल अभिभावक के साथ रहने वाले, प्रवासी परिवारों के बच्चे, ईंट-भट्ठों, होटल-ढाबों, रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले तथा विभिन्न कारणों से ड्रॉपआउट हुए बच्चे शामिल हैं.

 

विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि राज्य में एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. इसके लिए यूनिसेफ, बाल संरक्षण आयोग, श्रम विभाग, पुलिस विभाग समेत विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ समन्वय कर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.

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