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Ranchi News : AISF का शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Ranchi : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) झारखंड ने आज राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. संगठन ने आरोप लगाया कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है और यदि छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा.
 

Ranchi : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) झारखंड ने आज राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. संगठन ने आरोप लगाया कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है और यदि छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा.

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AISF के राज्य सचिव विक्रम कुमार ने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को खर्च नहीं बल्कि भविष्य में निवेश माने और राज्य के हर बच्चे को समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए.

 

संगठन ने सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें सभी रिक्त शिक्षक पदों पर स्थायी नियुक्ति, सरकारी स्कूलों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान एवं डिजिटल सुविधाओं की व्यवस्था, गरीब एवं बीपीएल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति का समयबद्ध भुगतान, शिक्षा बजट में वृद्धि और निजीकरण पर रोक और आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं दूरदराज़ क्षेत्रों के छात्रों के लिए विशेष शैक्षणिक सहायता और छात्रावास की व्यवस्था शामिल है.

 

प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु सिंह ने कहा कि सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद वर्षों से खाली हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने आधारभूत सुविधाओं की कमी, परीक्षा एवं परिणाम में देरी, छात्रवृत्ति में अनियमितता और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो AISF पूरे झारखंड में आंदोलन करेगा.

 

प्रदेश सह-सचिव अफजल दुर्रानी ने आरोप लगाया कि सरकार उच्च शिक्षा नीति में लगातार बदलाव कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. उन्होंने कहा कि क्लस्टर सिस्टम लागू कर छात्रों को शिक्षा से दूर किया जा रहा है और कई कॉलेजों में बीएससी की पढ़ाई बंद करना छात्र हितों के खिलाफ है. उन्होंने ई-कल्याण छात्रवृत्ति के समय पर भुगतान नहीं होने का भी मुद्दा उठाया और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए छात्र हित में उन्हें वापस लेने की मांग की.

 

प्रदेश सह-सचिव एहतेशाम प्रवीण ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के नए प्रस्ताव (Resolution) की आलोचना करते हुए इसे ऐतिहासिक Downward Filtration Theory से जोड़कर बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति (NEP) छात्रों को वैचारिक रूप से प्रभावित करने की दिशा में काम कर रही है.

 

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