Ranchi: भगवान बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस पर मंगलवार को बिरसा चौक स्थित जेल पार्क और कोकर समाधि स्थल पर फूल माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. इस अवसर पर बड़ी संख्या में बिरसाइत अनुयायी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि पहुंचे और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं समाधि स्थल पर फूल-माला चढ़ाए गए. भगवान बिरसा मुंडा के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को याद किया.
वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा का सपना अपने राज्य और अपने अधिकारों की रक्षा करना था, लेकिन आज भी जल, जंगल और जमीन पर संकट बना हुआ है. झारखंड आंदोलन कारी पुष्कर महतो ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जाता है, वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों को जंगल और जमीन सौंपे जाने से आदिवासी समाज की चिंता बढ़ रही है.
वार्ड पार्षद अवधेश बैठा और अमीत मुंडा ने कहा कि समाज को एकजुट होकर अपनी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करनी होगी. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का रास्ता दिखाया था, जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है. कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने झारखंडियों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.
मात्र 25 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उनका संघर्ष आज भी समाज को प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरे समाज को बिरसा मुंडा के उलगुलान की तर्ज पर काम करने की आवश्यकता है. तोरपा से सैकड़ों की संख्या में पहुंचे बिरसाइत अनुयायियों ने अपने नायक को श्रद्धांजलि अर्पित की. शहादत दिवस पर उनके संघर्षों और बलिदान को याद कर कई अनुयायी भावुक हो गए.
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