Ranchi : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गायत्री परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आज 'ग्रीन कैंपस, क्लीन कैंपस' अभियान का शुभारंभ किया. अभियान के पहले चरण में विश्वविद्यालय परिसर में 1800 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही पौधों के संरक्षण, देखभाल और निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है.
अभियान का शुभारंभ विज्ञान भवन सभागार में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम में कार्यवाहक कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर, कुलसचिव (प्रभारी) के. कोसला राव, मुख्य अतिथि सिद्धार्थ त्रिपाठी (आईएफएस), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) तथा गायत्री परिवार के वरिष्ठ प्रतिनिधि पुरुषोत्तम कुमार यादव सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.

कुलसचिव (प्रभारी) के. कोसला राव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकता बना रहा है. उन्होंने बताया कि 'ग्रीन कैंपस, क्लीन कैंपस' विश्वविद्यालय की दीर्घकालिक पर्यावरणीय नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
मुख्य अतिथि सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान अधिकाधिक वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण है. उन्होंने विद्यार्थियों से पौधारोपण को सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि एक पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही सच्चा पर्यावरण संरक्षण है.
कार्यवाहक कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित और टिकाऊ परिसर का निर्माण करना है. उन्होंने बताया कि लगाए जाने वाले पौधों की नियमित निगरानी, सिंचाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं.
कार्यक्रम के दौरान 'ग्रीन कैंपस, क्लीन कैंपस' विषय पर आधारित जागरूकता वीडियो का प्रदर्शन किया गया. इसके बाद प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, छात्र-छात्रा छात्रावास और परिसर के विभिन्न स्थानों पर छायादार, फलदार व औषधीय पौधों का सामूहिक रूप से रोपण किया गया. सभी प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि यह केवल एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय अभियान है. प्रथम चरण के बाद भी चरणबद्ध तरीके से पौधारोपण जारी रहेगा, ताकि केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड को एक स्वच्छ, हरित और जैव-विविधता संपन्न परिसर के रूप में विकसित किया जा सके.


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