Ranchi: मानव तस्करी और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई के उद्देश्य से बुधवार को रांची स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट में एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में भारत और अमेरिका के सुरक्षा विशेषज्ञों, पुलिस अधिकारियों, बाल अधिकार कार्यकर्ताओं तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मानव तस्करी की रोकथाम को लेकर अपने अनुभव साझा किए.
कार्यक्रम का संचालन झारखंड पुलिस के स्पेशल ब्रांच के डीआईजी संजीव कुमार ने किया. उन्होंने मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, इसके नेटवर्क और इससे निपटने में तकनीक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम में झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, शक्ति वाहिनी के प्रतिनिधि और झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य विकास दोराजका समेत कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया. वक्ताओं ने कहा कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय चुनौती भी है, जिससे निपटने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है.
इस अवसर पर अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता की कॉन्सुल जनरल कैथी गाइल्स-डियाज, पॉलिटिकल-इकोनॉमिक चीफ ब्रैफस कालुंड तथा ओवरसीज क्रिमिनल इन्वेस्टिगेटर स्कॉट कांग ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने मानव तस्करी के मामलों की जांच, पीड़ितों के संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि एफबीआई के स्पेशल एजेंट माइकल लिविंगुड समेत अमेरिकी विशेषज्ञ डेविड रग्गिएरो और रेमंड विलानुएवा वर्चुअल माध्यम से जुड़े. उन्होंने वित्तीय खुफिया जानकारी (Financial Intelligence), डिजिटल तकनीक और साइबर ट्रैकिंग के माध्यम से मानव तस्करी सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई के वैश्विक अनुभव साझा किए.
वक्ताओं ने कहा कि मानव तस्करी के नेटवर्क अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में आधुनिक तकनीक, वित्तीय निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही इन संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव है.
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में पुलिस, प्रशासन, न्याय व्यवस्था, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की समान भागीदारी जरूरी है. विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि भारत और अमेरिका के बीच इस तरह का सहयोग बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
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