Ranchi: रायसा जलाशय परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार को बुंडु के गितिलडीह गांव में संयुक्त ग्राम सभा की आम सभा हुई. सभा में ग्रामीणों ने परियोजना का विरोध किए और आंदोलन तेज करने की ऐलान किया गया.
परियोजना रद्द नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
पारंपरिक ग्राम सभा समन्वय समिति झारखंड के अध्यक्ष बिनसाए मुंडा ने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी परियोजना को लागू नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि रायसा जलाशय परियोजना का काम पहले शुरू कर दिया गया और बाद में ग्राम सभा की औपचारिकता पूरी की गई. उन्होंने कहा कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और व्यापक होगा.
खूंटकट्टी जमीन पर सरकार का नहीं अधिकार
बिनसाए मुंडा ने कहा कि खूंटकट्टी मौजा की जमीन पर सरकार का स्वामित्व नहीं है. ग्राम सभा और स्थानीय समुदाय की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण या परियोजना लागू करना आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन है.
जल, जंगल और जमीन बचाने को एकजुट समाज
संपूर्ण आदिवासी समाज झारखंड के अध्यक्ष पंचानन मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी भाषा, संस्कृति, धर्म, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट है. लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी.
जमीन भी नहीं देंगे, जान भी नहीं देंगे
आदिवासी जन परिषद पांचपरगना के अध्यक्ष सिदाम सिंह मुंडा ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा का पारंपरिक अधिकार है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अब जमीन भी नहीं देंगे, जान भी नहीं देंगे का नारा और मजबूती से गूंजेगा
संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प
सभा के अंत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से रायसा जलाशय परियोजना को रद्द करने की मांग दोहराई और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिए गए.कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिला-पुरुष और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
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