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Ranchi News: हरमू बाईपास में 40 साल से बसे दुकानदारों पर संकट, बोले – अब तक कोई नोटिस नहीं

Ranchi: रांची के हरमू बाईपास के पास करीब 11-15 दुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट आ सकता है. दरअसल पिछले 40 सालों से वे दुकान चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं. लेकिन ये दुकान जिस जमीन पर स्थित है, अब उसपर संकट आ सकता है. चूंकि ये आदिवासी जमीन है, जिसे खाली कराये जाने की बात सामने आयी है. हालांकि वर्षों पहले दुकानदारों ने रिलीज/एग्रीमेंट के आधार पर इस जमीन पर अपनी दुकानें बनाई थीं, तब से लगातार सभी दुकानदार यहां कारोबार कर रहे हैं.
 

Riya Kispotta 

Ranchi: रांची के हरमू बाईपास के पास करीब 11-15 दुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट आ सकता है. दरअसल पिछले 40 सालों से वे दुकान चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं. लेकिन ये दुकान जिस जमीन पर स्थित है, अब उसपर संकट आ सकता है. चूंकि ये आदिवासी जमीन है, जिसे खाली कराये जाने की बात सामने आयी है. हालांकि वर्षों पहले दुकानदारों ने रिलीज/एग्रीमेंट के आधार पर इस जमीन पर अपनी दुकानें बनाई थीं, तब से लगातार सभी दुकानदार यहां कारोबार कर रहे हैं.

 

दुकानदारों का कहना है कि जमीन मालिक के बेटों द्वारा कथित रूप से इस जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है. दुकानदारों का आरोप है कि जमीन की बिक्री से पहले उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई और न ही उनसे कोई बातचीत की गई.

 

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अब दुकानदारों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है, उनका कहना है कि कुछ लोग वहां पहुंचकर दुकानों को खाली करने की धमकी दे रहे हैं. दुकानदारों के मुताबिक, भाजपा नेता रमेश सिंह का नाम भी इस मामले में सामने आ रहा है. दुकानदारों का आरोप है कि उनके लोग आकर दुकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं. हालांकि इस मामले में दूसरी पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.


दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले चार दशक से यहां बसे हुए हैं और उनके पास एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं. उनका कहना है कि यदि जमीन को लेकर कोई कानूनी प्रक्रिया करनी है तो पहले उनसे बातचीत की जाए और कोर्ट के माध्यम से नोटिस दिया जाए बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए उन्हें जबरन हटाना गलत होगा.


दुकानदारों ने यह भी बताया कि अब तक उनकी जमीन मालिक या उनके परिवार से कोई सीधी बातचीत नहीं हो पाई है. ऐसे में सभी दुकानदार डर और असमंजस की स्थिति में हैं, उनका कहना है कि यह सिर्फ दुकान नहीं बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा है.

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