- दादा साहब फाल्के को किया नमन

इस अवसर पर विभाग के शिक्षक सह अंतर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माता अनुज कुमार ने दादा साहब फाल्के के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मूक सिनेमा के दौर में फिल्म बनाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था, बावजूद इसके फिल्म निर्माताओं ने इन चुनौतियों को पार कर भारतीय फिल्म उद्योग की मजबूत नींव रखी. उन्होंने बताया कि ‘राजा हरिश्चंद्र’ को भारत की पहली फीचर फिल्म होने का गौरव प्राप्त है, जिसमें महिलाओं के किरदार पुरुष कलाकारों द्वारा निभाए गए थे और फाल्के के परिवार का भी फिल्म निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा.
असिस्टेंट प्रोफेसर महिमा गोल्डेन बिलुंग ने कहा कि ‘राजा हरिश्चंद्र’ भारतीय सिनेमा की एक ऐतिहासिक शुरुआत है, जिसने समाज के दर्पण के रूप में फिल्मों की भूमिका को स्थापित किया. उन्होंने कहा कि सिनेमा ने मूक फिल्मों से लेकर बोलती फिल्मों, स्वर्णिम दौर, नई लहर, रंगीन सिनेमा, मल्टीप्लेक्स और आज के डिजिटल एवं ओटीटी प्लेटफॉर्म तक लंबा सफर तय किया है. वर्ष 1913 से 2026 तक सिनेमा के 113 वर्षों में भारतीय फिल्मों ने विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है.


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