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Ranchi News: मेला में सजा पारंपरिक वाद्ययंत्र व तीर-धनुष की दुकान, भीड़ की चहल-पहल से मेले में रौनक

धुर्वा स्थित बड़कागढ़ मेला में इस बार पारंपरिक वाद्ययंत्रों और तीर-धनुष की दुकानों पर खरीदारों का उत्साह देखने को मिल रहा है. स्थानीय कारीगरों के हाथ से बनाए गए वाद्ययंत्र और पारंपरिक वस्तुएं लोगों को  अपनी ओर आकर्षित कर रहे है.
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Ranchi: धुर्वा स्थित बड़कागढ़ मेला में इस बार पारंपरिक वाद्ययंत्रों और तीर-धनुष की दुकानों पर खरीदारों का उत्साह देखने को मिल रहा है. स्थानीय कारीगरों के हाथ से बनाए गए वाद्ययंत्र और पारंपरिक वस्तुएं लोगों को  अपनी ओर आकर्षित कर रहे है. दुकानदारों ने बताया कि इस वर्ष वस्तुओं की कीमतों में करीब एक हजार रुपये मंहगे हुए है. क्योंकि बाजार लगाने व महंगे पेट्रोल-डीजल की बढ़ोतरी के वजह से महंगाई बढ़ी है. 

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मेले में लकड़ी का पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल 8,000 रुपये, नगाड़ा 4,000 रुपये, गुमला का नगाड़ा 4,000 रुपये और सीसई का मांदर 7,500 रुपये में मेला में मिल रहा है. वहीं हाथ से बनाई गई शहनाई 1,800 रुपये प्रति पीस और नरसिंहा 1,200 रुपये में मेला में बिक रहे हैं. इसके अलावा पईला 320 रुपये, बांस की कुमनी 350 रुपये में खरीदारी की जा सकती है. 

 

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पारंपरिक हथियार तीर-धनुष भी 450 रुपये में एक सेट मिल रहे हैं. जगनाथ मंदिर के जाने वाले सभी मुख्य मार्ग- एचईसी रोड, नयासराय रोड और हटिया रोड पर नवविवाहित दंपतियों द्वारा बांस की टहनियां अर्पण किए जा रहे हैं. इसके अर्पित करने से परिवारों में वंश आगे बढ़ता चला जाता है. लोगों ने बताया कि शहर में बांस नहीं है. इस वजह से सड़कों पर लगाए गए बांस के टहनियों को भगवान का साक्ष्य मानकर अर्पित किए गए.

 

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