Search

 
 
 

Ranchi News : RINPAS में लैंगिक समानता व मानसिक स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण, 30 प्रतिभागी शामिल

Ranchi News : RINPAS की निदेशक ने कहा कि समावेशन का मतलब केवल अलग-अलग लोगों को एक जगह लाना नहीं है. जरूरी है कि हर व्यक्ति की बात सुनी जाए, उसके अनुभव का सम्मान हो और वह खुद को सुरक्षित महसूस करे. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने और निर्णय लेने में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए.
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम

Ranchi News : RINPAS के जे.ई. धुंजीभॉय अकादमिक एवं अनुसंधान केंद्र में सोमवार को लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समावेशन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का विषय “Gender, Mental Health and Inclusive Practices for CSOs” था. इसका आयोजन CINI झारखंड ने RINPAS के तकनीकी सहयोग से किया.

 

इसे भी पढ़ें...

 

कार्यक्रम में सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) के प्रतिनिधियों के अलावा RINPAS के अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल हुए. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य लोगों को लैंगिक समानता, सामाजिक भेदभाव, मानसिक स्वास्थ्य और समावेशन के बारे में समझ देना था.

 

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने लैंगिक भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और इनका मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी दी. प्रतिभागियों को संवेदनशील तरीके से बातचीत करने, सहमति लेने, गोपनीयता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर सही जगह रेफर करने की प्रक्रिया भी समझाई गई.

 

कार्यक्रम में लैंगिकता, विविधता और सामाजिक समावेशन को लेकर विशेषज्ञ सत्र हुए. इसके साथ ही केस स्टडी, समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और संगठन में समावेशी व्यवस्था की समीक्षा जैसे सत्र भी आयोजित किए गए. मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहयोग को लेकर भी प्रतिभागियों को जरूरी जानकारी दी गई.

 

RINPAS की निदेशक ने कहा कि समावेशन का मतलब केवल अलग-अलग लोगों को एक जगह लाना नहीं है. जरूरी है कि हर व्यक्ति की बात सुनी जाए, उसके अनुभव का सम्मान हो और वह खुद को सुरक्षित महसूस करे. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने और निर्णय लेने में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए.

 

उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता केवल महिला और पुरुष को समान अवसर देने तक सीमित नहीं है. समाज में मौजूद लैंगिक सोच और भेदभाव को कम करना भी जरूरी है. ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां हर व्यक्ति अपनी पहचान की परवाह किए बिना आगे बढ़ सके.

 

मानसिक स्वास्थ्य पर बात करते हुए निदेशक ने कहा कि भेदभाव, हिंसा, सामाजिक दबाव और बहिष्कार का व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करने और जरूरतमंद लोगों को सही मदद उपलब्ध कराने की जरूरत है.

 

कार्यक्रम में CSOs की भूमिका पर भी चर्चा हुई. बताया गया कि सिविल सोसाइटी संगठन समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने, सुरक्षित संवाद का माहौल बनाने और कमजोर वर्गों की आवाज को सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

 

प्रशिक्षण में करीब 30 लोगों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने संगठनों में लैंगिक समानता और समावेशी कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए 30 दिन की कार्ययोजना तैयार की.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही