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Ranchi : BIT मेसरा में RESCOL-VI का शुभारंभ, सामाजिक प्रभाव व अकादमिक नैतिकता पर शोध को मिला नया मंच

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Ranchi : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा में मंगलवार को छठे रिसर्च कोलोक्वियम RESCOL-VI का उद्घाटन हुआ. दो दिवसीय इस अंतःविषय शोध सम्मेलन में देशभर के शोधार्थी और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं. सम्मेलन में कुल 269 शोध प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें 123 मौखिक (Oral) और 146 पोस्टर प्रेजेंटेशन शामिल हैं.


बीआईटी के कैट (CAT) हॉल में आयोजित उद्घाटन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि आईआईआईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव, बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया.


आयोजन सचिव प्रो. प्रियंक सक्सेना ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि यह कोलोक्वियम शोधार्थियों के लिए विचारों के आदान-प्रदान और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है. वहीं, स्नातकोत्तर अध्ययन के डीन प्रो. एस.एस. सोलंकी ने शोधार्थियों से जिज्ञासा, साहस और कल्पनाशीलता के साथ अनुसंधान करने का आह्वान किया.


अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता के डीन प्रो. राजू पोद्दार ने "360-डिग्री रिसर्च इकोसिस्टम" की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न विषयों के बीच सहयोग से नए और प्रभावी शोध सामने आते हैं.


अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यदि ज्ञान एक धर्म है, तो अनुसंधान उसकी पूजा है. उन्होंने बताया कि बीआईटी मेसरा ने अनुसंधान सुविधाओं और अत्याधुनिक उपकरणों पर 5 से 6 करोड़ रुपये का निवेश किया है और संस्थागत संसाधनों से 500 शोधार्थियों को छात्रवृत्ति सहायता देने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शोध केवल पेटेंट तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि "नैतिकता के बिना अनुसंधान राक्षसी है.


मुख्य अतिथि प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने युवा शोधकर्ताओं से गणित, भौतिकी और सांख्यिकी की बुनियाद मजबूत करने और "नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाले" बनने का आह्वान किया.


पोस्टर प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र

कोलोक्वियम के दौरान आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रही, जहां पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों का प्रदर्शन किया. शोधार्थियों ने कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और अन्य अतिथियों को अपने शोध की विस्तार से जानकारी दी और उनसे सीधे सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त किया.

 

इस दौरान "फिजिक्स-गाइडेड ब्लाइंड हाइपरस्पेक्ट्रल अनमिक्सिंग" सहित कई नवाचारपूर्ण परियोजनाएं प्रस्तुत की गईं. यह संवादात्मक सत्र युवा शोधकर्ताओं के लिए अपने कार्य को विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करने और मूल्यवान प्रतिक्रिया प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ. उद्घाटन सत्र का समापन सह-आयोजन सचिव डॉ. आनंद प्रसाद सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ.

 

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