Ranchi: देश भर में यूजीसी रेगुलेशन 2026 लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन किए गए. छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में मार्च निकाला. शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून बनाने और यूजीसी के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता कानूनता 2026 को प्रभावी ढंग से लागू कराने की मांग को लेकर ये प्रदर्शन किया गया. ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले विभिन्न छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से “अखिल भारतीय वंचित अधिकार दिवस” मनाया.

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), आदिवासी छात्र संघ, छात्र राजद, एआईएसएफ, एनएसयूआई समेत अन्य संगठनों के बैनर तले निकाला गया मार्च डीएसपीएमयू के मुख्य गेट से शुरू होकर विश्वविद्यालय परिसर तक गया. इसके बाद आयोजित सभा में छात्र नेताओं ने अपने विचार रखें.
वक्ताओं ने कहा कि वे यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन 2026 का स्वागत करते हैं, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में रोहित एक्ट की तर्ज पर ठोस गाइडलाइंस लागू की जाएं और कैंपस में जातीय भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में 2019 से 2024 के बीच जातीय भेदभाव की घटनाओं में 118 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है.
प्रदर्शन में रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी की संस्थानिक मौतों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जातीय उत्पीड़न आज भी छात्रों के पढ़ाई छोड़ने और आत्महत्या जैसे कदम उठाने का कारण बन रहा है. वक्ताओं ने कैंपस में जातीय के साथ-साथ नस्लीय भेदभाव की घटनाओं पर भी चिंता जताई और हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए सख्त कानून और व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की मांग की.
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को परीक्षा और इंटरव्यू में भेदभाव का सामना करना पड़ता है. कई मामलों में सभी योग्यताएं पूरी करने के बावजूद (Not Found Suitable) यानी “योग्य उम्मीदवार नहीं मिला” बताकर पदों को खाली छोड़ दिया जाता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव वंचित समुदायों के छात्रों पर पड़ता है.
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