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Ranchi : किसी संस्था की प्रगति का आधार उसका नियमसम्मत प्रबंधन है- जस्टिस SN प्रसाद

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सह कार्यकारी अध्यक्ष झालसा सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा है कि किसी भी संस्था की प्रगति एवं जनविश्वास का आधार उसके वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी, जवाबदेह एवं नियमसम्मत प्रबंधन है. उन्होंने बताया कि बजट निर्माण, व्यय एवं निधियों के उपयोग में दूरदर्शिता और सामान्य वित्तीय नियमों का अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है.
 
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  • जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने कहा, सार्वजनिक धन का उपयोग करने वाले विभाग एवं संस्था के लिए वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी  है

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सह कार्यकारी अध्यक्ष झालसा सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा है कि किसी भी संस्था की प्रगति एवं जनविश्वास का आधार उसके वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी, जवाबदेह एवं नियमसम्मत प्रबंधन है. उन्होंने बताया कि बजट निर्माण, व्यय एवं निधियों के उपयोग में दूरदर्शिता और सामान्य वित्तीय नियमों का अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है. 

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जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद बतौर मुख्य अतिथि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की ओर से शनिवार को वित्तीय प्रबंधन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे. जिला विधिक सेवा प्राधिकार में वित्तीय कौशल को बेहतर बनाने के विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम झालसा सभागार, न्याय सदन, डोरंडा में किया गया.

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जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के सचिवों से कहा कि वे वित्तीय प्रबंधन की रीढ़ हैं और बजट तैयार करने, निधियों के समुचित उपयोग एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं. उन्होंने कहा कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना निधियों का अन्य मद में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और प्रत्येक व्यय का विधिवत अभिलेख एवं वाउचर सुरक्षित रखा जाना चाहिए. 

 

उन्होंने पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) एवं मध्यस्थों को उनके मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि समय पर भुगतान से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे. उन्होंने सचिवों से कार्यशाला को संवादात्मक बनाते हुए वित्तीय प्रबंधन से संबंधित सभी शंकाओं का विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त करने का आह्वान किया, ताकि विधिक सेवा संस्थाओं की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बन सके.
 

हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने मौके पर कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग करने वाले प्रत्येक विभाग एवं संस्था के लिए वित्तीय अनुशासन अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विधि के दौरान वित्तीय प्रबंधन एवं वित्तीय नियमों का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल पाता, जबकि न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए इनका ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है.

 

उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के सचिव बजट निर्माण, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय व्यय के प्रमुख अधिकारी होते हैं. इसलिए उनके लिए वित्तीय नियमों की समुचित जानकारी आवश्यक है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी और विषय पर सार्थक विचार-विमर्श होगा.


इससे पहले उद्घाटन सत्र में झालसा न्यूजलेटर अप्रैल से जून 2026 का भी विमोचन किया गया एवं बिरसा कॉलेज, खूंटी के छात्रों को नालसा द्वारा उनके द्वारा तैयार किए गए रील को भारतवर्ष में सर्वोत्तम पुरस्कार प्रदान किए जाने पर सम्मानित किया गया.


कार्यशाला में स्वागत भाषण झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना एवं धन्यवाद ज्ञापन उप निबंधक सह उप सचिव, झालसा अभिषेक कुमार ने किया. उक्त कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए थे.

 

कार्यक्रम का उद्घाटन सुबह 10:30 बजे मुख्य अतिथि जस्टिस न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, विशिष्ट अतिथि जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने किया था. कार्यशाला के तकनीकी सत्र में वक्ता के रूप में फैजान अहमद, पूर्व वरिष्ठ डी.ए. जी., झारखंड, अजय कुमार, पूर्व वरिष्ठ डीएजी, झारखंड,  कुणाल चौरसिया, सलाहकार, GeM,  विजय वर्धन, वरिष्ठ लेखा अधिकारी,  संदीप कुमार रॉय, सहायक लेखा अधिकारी, विकाश रवानी, वरिष्ठ तकनीकी सहायता इंजीनियर एवं करन कुमार, तकनीकी सहायता इंजीनियर शामिल थे.

 

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