Ranchi News: रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया. विश्वविद्यालय के छात्र कला एवं संस्कृति निदेशालय के निर्देशन में जनजातीय गौरव पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है. इस अवसर पर कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने घोषणा की कि रांची विश्वविद्यालय हर साल पांच प्रतिभाशाली जनजातीय छात्रों को पांच-पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देगा.
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि झारखंड का जनजातीय इतिहास, रहन-सहन और संस्कृति बेहद समृद्ध है. झारखंड में उन्हें हमेशा रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है. उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र खिलाड़ियों को भी शुभकामनाएं देते हुए खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया.
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इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और रांची विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सुमराय टेटे को सम्मानित किया गया. उन्होंने विश्वविद्यालय और कुलपति प्रो. सरोज शर्मा के प्रति आभार जताया.
टीआरएल विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरि उरांव ने अपने संबोधन में झारखंड की जनजातीय संस्कृति और समाज की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने एक बार कहा था कि उन्होंने रांची में अपना घर इसलिए बनाया, क्योंकि यहां के लोग पूजा और प्रार्थना में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव, समाज और देश के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
पद्मश्री मधु मंसूरी ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन आदिवासियों की कला, संस्कृति और भाषा का संरक्षण उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. पारंपरिक खेल, गीत और संगीत आधुनिकता की दौड़ में धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं. आदिवासी अपनी ही जमीन से विस्थापित हो रहे हैं. ऐसे में विकास के साथ उनकी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को बचाना भी जरूरी है.
रांची विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों में भी जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाया जा रहा है. कार्यक्रम का संचालन डॉ. नियति कल्प ने किया.
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