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रांचीः सदर अस्पताल में जन्मजात हृदय रोग पर कार्यशाला, 100 डॉक्टरों ने लिया भाग

कार्यशाला का उद्घाटन करते स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी व अन्य.

Ranchi : सदर अस्पताल, रांची में शुक्रवार को जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी बतौर मुख्य अतिथि शरीक हुए. वहीं, राज्य भर से करीब 100 निजी व सरकारी अस्पतालों के शिशु रोग विशेषज्ञों औ डॉक्टरों ने भाग लिया.


स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस आयोजन के लिए अमृता हॉस्पिटल की टीम की सराहना की. कहा कि अमृता हॉस्पिटल में झारखंड के करीब 250 बच्चों की मुफ्त सर्जरी हुई है. उन्होंने कहा कि आने वाले एक साल में RIMS 2 के रूप राज्य को एक बड़ा आधुनिक अस्पताल मिलेगा. साथ ही रिनपास में मेडिको सिटी विकसित की जाएगी और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में राज्य में 8 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक जैसे AI को भी लाया जाएगा.

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग एक गंभीर समस्या है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज होने पर 90 प्रतिशत तक बच्चे स्वस्थ हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि भविष्य में इस तरह की सर्जरी सदर अस्पताल में ही करने की योजना है, ताकि मरीजों को बाहर न जाना पड़े. साथ ही अलग-अलग जिलों में स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे.

 

अमृता हॉस्पिटल कोच्ची के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ आर कृष्ण कुमार ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग जन्म से मौजूद हृदय की संरचना में खराबी होती है, जो लगभग 1000 में से 8 बच्चों को प्रभावित करती है. इसके लक्षणों में शरीर का नीला पड़ना, दूध पीने में दिक्कत, तेज सांस लेना और वजन न बढ़ना शामिल है. उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सर्जरी से अधिकतर बच्चों का इलाज संभव है.


राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत आयोजित इस कार्यशाला में कार्यशाला में हार्ट सर्जन डॉ ब्रजेश पीके, डॉ निशांत, डॉ अमित कुमार पांडेय, राज्य नोडल पदाधिकारी (RKSK) डॉ विजय किशोर रजक, सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार समेत कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे.


सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय पर पहचान और इलाज बहुत जरूरी है. समय पर उपचार मिलने से बच्चे सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने रोग की पहचान, प्रबंधन और उपचार पर विस्तार से चर्चा की. 


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