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आरबीआई ने की बैंकों के साथ बैठक, लॉकडाउन, लोन रिस्ट्रक्चरिंग लोन मोरेटोरियम पर चर्चा!

 NewDelhi : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकारी बैंकों और चुनिंदा प्राइवेट बैंक के एमडी और सीईओ के साथ बैठक की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैठक में कोरोना की दूसरी वेव पर चर्चा की गयी. इस क्रम में  बैंकों ने आरबीआई से आग्रह किया कि कई राज्य लॉकडाउन की तैयारी कर रहे है. ऐसे में RBI को फिर कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे. बैंकों ने गवर्नर से  लोन रिस्ट्रक्चरिंग पर कुछ जरूरी कदम उठाने की गुहार लगायी. 

  बता दें कि आरबीआई ने 27 मार्च 2020 को एक मार्च से 31 मई 2020 के दौरान लोन की किस्‍तें वसूलने पर मोरेटोरियम दिया था.  बाद में यह अवधि बढ़ाकर 31 अगस्‍त की गयी थी. केंद्रीय बैंक ने बैंकों को लोन स्‍ट्रक्‍चरिंग का विकल्‍प भी दिया था. इसके लिए उन्‍हें ऐसे कर्ज को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित करने से मना किया गया था.

क्या है लोन रिस्ट्रक्चरिंग  

लोन रिस्ट्रक्चरिंग का अर्थ यह कि यदि आपने कोई कर्ज लिया है. इसकी समय सीमा 3 साल है. ब्याज 9 फीसदी है. आपने पिछले कुछ महीनों से ईएमआई नहीं भरी है तो आपको रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा मिलेगी. हालांकि यह बैंक के ऊपर है कि वह किस तरह आपको छूट देगा या नहीं देगा.

आरबीआई और बैंकों के बीच हुई बैठक में क्या हुआ

खबरों के अनुसार बैठक में आरबीआई से बैंकों ने कहा कि मार्च तक पूरी होने वाली रीस्ट्रक्चरिंग की समय सीमा जून तक बढ़ाई जाये. कोरोना की दूसरी लहर की वजह से कुछ मामलों में दोबारा रीस्ट्रक्चरिंग की जरूरत पड़ सकती है. कहा गया कि लॉकडाउन लंबा चला या और ज्यादा राज्यों में लागू हुआ तो मोरेटोरियम जैसी योजना की भी आवश्यक होगी.

लॉकडाउन लगा तो क्या होगा?

कोरोना संक्रमण मामलों में आयी तेजी के बाद कई राज्यों ने लॉकडाउन की तैयारी किये जाने की खबरें आ रही हैं.   महाराष्ट्र को लेकर लगातार इस तरह की खबर है. बता दें कि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई की अर्थव्यवस्था का साइज 22,50,000 करोड़ रुपये की है. मुंबई की अर्थव्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था में कुल 5 फीसदी का योगदान देती है. मुंबई में सर्विस सेक्टर का अहम रोल है.   रिपोर्ट के अनुसार  मुंबई सर्विस सेक्टर का सालाना कारोबार 4,00,000 करोड़ रुपये से अधिक है. कहा गया कि सर्विस इंडस्ट्री के आधे हिस्से के भी रुकने से महीने में 16,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

RBI और बैंकों के बीच हुई बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ है. इसको लेकर बैंकों ने भी कोई बयान अभी तक जारी नहीं किया है.  पिछले दिनों आये आर्थिक आंकड़े इस दिशा में  इशारा कर रहे है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI फिलहाल इस ओर कोई कदम उठायेगा. क्योंकि इस तरह की वेव ज्यादा लंबी नहीं  होती है. यूरोप में भी दूसरी वेव 15-20 दिन तक ही चली थी.

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