Ranchi : CUJ के प्रबंधन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रचना जायसवाल का शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल International Journal of Contemporary Hospitality Management में प्रकाशित हुआ है. यह जर्नल ABDC-A श्रेणी में शामिल है और स्कोपस में सूचीबद्ध उच्च गुणवत्ता की शोध पत्रिका मानी जाती है.
डॉ. जायसवाल का यह शोध सृजनात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Generative AI) और बड़े भाषा मॉडल (LLMs) के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में पर्सनलाइजेशन (व्यक्तिगत सेवाओं) के प्रभाव का विश्लेषण करता है. अध्ययन में पाया गया है कि भावनात्मक रूप से सक्षम एआई आधारित सिस्टम ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं, उनकी संतुष्टि बढ़ाते हैं और ब्रांड के प्रति निष्ठा को मजबूत करते हैं.
हालांकि, शोध में यह भी सामने आया है कि अत्यधिक या असंतुलित पर्सनलाइजेशन से ग्राहकों पर मानसिक दबाव (Cognitive Overload) बढ़ सकता है. साथ ही पर्सनलाइजेशन फटीग यानी अधिक निजीकरण से ऊब की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे ग्राहक अनुभव नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है.
इस अध्ययन में पर्सनलाइजेशन को पांच प्रमुख आयामों सांस्कृतिक, डिजिटल, आर्थिक, अनुभवात्मक और भावनात्मक-संज्ञानात्मक के आधार पर समझाया गया है. शोध यह संकेत देता है कि केवल तकनीकी सुधार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उपयोगकर्ता की भावनाओं और सामाजिक संदर्भ को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
डॉ. रचना जायसवाल ने कहा कि भविष्य में एआई आधारित सेवाओं को केवल तकनीकी रूप से उन्नत बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें मानव-केंद्रित, नैतिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील बनाना भी आवश्यक है.
यह शोध हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और नीति-निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है और भविष्य के अनुसंधान के लिए नई दिशा प्रदान करता है. इस अध्ययन में शशांक गुप्ता (Morgan Stanley) और डॉ. पो-जू चेन (Texas A&M University, USA) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा.
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