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हाथी-मानव संघर्ष और हाथी कॉरिडोर पर होगा शोध

Kaushal Anand  Ranchi : झारखंड में हाथी-मानव संघर्ष और इसको लेकर जान-मान की क्षति की घटनाएं आये दिन हो रही हैं. इसको लेकर कई तरह की बातें सामने आयी हैं. मगर यह संघर्ष क्यों हो रहा है? हाथी मानव के रहने वाले क्षेत्र में कैसे प्रवेश कर रहे हैं? इसके मूल कारण क्या है? इस पर समेकित रूप से अब लोग जान पाएंगे. आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा संचालित डाॅ. रामदयाल मुंडा शोध संस्थान हाथी-मानव संघर्ष और हाथी कॉरिडोर को लेकर शोध करायेगा. इसे भी पढ़ें - छत्तीसगढ़">https://lagatar.in/chhattisgarh-income-tax-department-raids-in-many-districts-including-raipur-stir/">छत्तीसगढ़

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औद्योगीकरण, शहरीकरण के कारण हाथियों को हो रही समस्या 

शोध संस्थान का मानना है कि आदिवासी या वनवासी हमेशा से जंगल में शांतिपूर्वक निवास करते रहे हैं, मगर आज यह शांति भंग सी हो गयी है. हाल के वर्षों में स्थिति और परिस्थियां बदली हैं. आज औद्योगीकरण, शहरीकरण और कृषि के विस्तार ने हाथियों को के लिए समस्या पैदा कर दी है. हाथियों को अब उन्हें अपना प्रवास मार्ग बदलने के लिए मजबूर कर दिया है. मगर अब यही परिवर्तन हाथी और मानव समाज दोनों को महंगी पड़ी रही है. बाकी झारखंड में हाथियों की आबादी में गिरावट देखी जा रही है. मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं में आदिवासी और वनवासी समुदायों को सबसे अधिक कीमत चुकानी पड़ी है.

शोध से मानव-हाथी दोनों को होगी मदद

शोध संस्थान का मानना है कि अब तक संबंधित विभाग, संस्थाएं ऐसे एनकाउंटर पर नजर रखते हैं इनके पास जरूरी डाटा की कोई कमी नहीं है. लेकिन प्रभावी उपाय के लिए प्रभावित समुदायों के अनुकूल कच्चे डाटा का विश्लेषण करने की आवश्यकता है. इस शोध के जरिए योजना और नीति निर्धारक करने वाले विभाग व संस्थाओं को साक्ष्य उपलब्ध करा कर मदद की जाएगी. इससे मानव और हाथियों दोनों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है.

शोध के मुख्य बिंदु ये रहेंगे

  • झारखंड में हाथी कॉरिडोर में बदलाव के पैटर्न की पहचान
  • प्रवासी मार्गों के परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारकों की गणना
  • हाथियों के प्रवास पैटर्न में बदलाव के कारण आर्थिक नुकसान पैटर्न (मानव-पशु संघर्ष, फसल पर हमला, बुनियादी ढांचे की क्षति)
  • लागत-लाभ विश्लेषण के साथ खर्च की गई लागत और अपेक्षित ठोस लाभ की गणना करने वाले मॉडल समाधान
  • विचाराधीन कैदियों और टीएसपी निधि से मिलने वाली राशि पर भी होगा शोध
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विभिन्न विभागों से मिलने वाली निधि का खर्च का मूल्यांकन करायेगा

इसके अतिरिक्त डाॅ. रामदयाल मुंडा शोध संस्थान टीएसपी (ट्राइबल सबप्लान)-2 के तहत विभिन्न विभागों से मिलने वाली निधि का खर्च का मूल्यांकन करायेगा. इसमें अब तक कितनी राशि इस प्लान के तहत मिली और इसका कितना फायदा टीएसपी जिलों में हुआ. इसमें ग्राम स्तर, संबंधित विभाग और नेताओं की भूमिका पर रिसर्च होगा. इसके साथ देश के अन्य राज्यों के टीएसपी जिलों का भी आकलन किया जाएगा. केंद्र सरकार टीएसपी के तहत कुल 32 विभागों की राशि इस मद में प्रदान करती है जो विभिन्न राज्यों को दी जाती है और टीएसपी जिलों में इस राशि का खर्च आदिवासियों के विकास के लिए किया जाता है. इसके अतिरिक्त डॉ. रामदयाल मुंडा संस्थान अंडर ट्रायल कैदियों की बढ़ती संख्या के पीछे का कारण पर भी शोध कराएगी. इसमें यह देखा जाएगा कि कहीं यह मानवाधिकार से जुड़ा मसला तो नहीं है. न्याय व्यवस्था में देरी एवं कमी के कारण ऐसे कैदियों की संख्या तो नहीं बढ़ रही है. इसमें इस बात का भी पता लगाया जाएगा कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, इसके पीछे उनके सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि का भी पता लगाया जाएगा. शोध संस्थान झारखंड के तीन कृषि क्षेत्र जिसमें 12 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान या फिर 5 वीं लघु सिंचाई योजना के तहत नोटिफाइड और लाभान्वित किए गऐ आदिवासी किसानों पर शोध कराएगा.

यह सारे झारखंड के ज्वलंत मुद्दे

यह सारे झारखंड के ज्वलंत मुद्दे हैं. जो सीधे तौर पर आदिवासी से जुड़े हैं. इससे आदिवासी न केवल प्रभावित होते हैं बल्कि उनका विकास और अस्तित्व भी जुड़ा है. अब तक इसको लेकर विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ पायी है. इसलिए डाॅ रामदयाल मुंडा शोध संस्थान में इस पर शोध कराने का निर्णय लिया है. इसे भी पढ़ें - योगेंद्र">https://lagatar.in/jharkhand-yogendra-saos-alleged-audio-viral-i-need-ninety-percent-work-in-chatti-bariatu-and-keredari-coal-blocks/">योगेंद्र

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