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अध्ययन में खुलासा : Corona की तरह दुनिया भर के समुद्रों में हैं 5500 से ज्यादा नयी प्रजाति के Virus

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Ohio (USA) :  कोरोना वायरस की तरह ही दुनिया भर के समुद्रों में 5500 से ज्यादा नयी प्रजाति के वायरस मिले हैं. एक नये अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है. बड़ी बात यह है कि ये सारे वायरस कोरोना की तरह ही RNA वायरस हैं. वैज्ञानिका का कहना है कि यह दुनिया के लिये चिंता का विषय है. खास बात यह है  कि  भारत के अरब सागर और हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में ये वायसर मौजूद है. इसे भी पढ़ें-पंचायत">https://lagatar.in/14-cells-have-been-constituted-for-panchayat-elections-koderma-dc/">पंचायत

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हाल ही में जर्नल Science">https://www.science.org/doi/10.1126/science.abm5847">Science

में इन वायरसों से संबंधित अध्ययन प्रकाशित हुई है. जिसमें बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने वायरसों की खोज के लिए दुनिया भर के समुद्रों के 121 स्थानों से पानी के 35 हजार सैंपल लिए. ये सभी वैज्ञानिक समुद्री क्लाइमेट चेंज का अध्ययन करने वाले तारा ओशंस कंसोर्टियम नामक ग्लोबल प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं.द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर मैथ्यू सुलिवन ने कहा है कि समुद्र से मिले वायरसों में बहुत ज्यादा अंतर है. इसे भी पढ़ें-बहरागोड़ा">https://lagatar.in/baharagora-arena-procession-from-ramnavami-ground-with-gaiety/">बहरागोड़ा

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ये सब नए फाइलम के हैं. इसमें से एक टाराविरिकोटा (Taraviricota) सभी समुद्रों में पाया गया है. यानी दुनिया के हर सागर में इसकी मौजूदगी दर्ज है. लेकिन ये इकोलॉजी के लिहाज से बेहद जरूरी हैं. RNA वायरसों की खोज और उसके अध्ययन के लिए कोरोना वायरस के वैरिएंट का डर था.  वैज्ञानिकों का कहना है कि खोज के दौरान उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी ज्यादा संख्या में वायरस मिलेंगे.मैथ्यू सुलिवन कहते हैं कि देखा जाये तो 5500 RNA वायरस बेहद छोटी संख्या है. अभी और खोज  की जाये तो संभव है कि लाखों की संख्या में नए वायरस मिलेंगे. इसे भी पढ़ें-एक्साइज">https://lagatar.in/considering-reducing-excise-duty-petrol-and-diesel-prices-may-come-down/">एक्साइज

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मानव पर इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिकों ने समुद्री प्लैंकटॉन्स (Planktons) के जेनेटिक सिक्वेंस का अध्ययन किया. इनके अंदर ही ये RNA वायरस मिले हैं. सभी RNA वायरसों में एक प्राचीन जीन RdRp मिला है, लेकिन यह अन्य वायरसों और कोशिकाओं में नहीं मिला. वैज्ञानिकों ने कुल मिलाकर 44 हजार जीन सिक्वेंस किए. लेकिन पता चला कि RdRp जीन अरबों साल पुराना है. यह कई बार इवॉल्व हो चुका है. यह इतना पुराना है कि इसकी उत्पत्ति और वंशावली खोजने में बहुत ज्यादा समय लगेगा इसे भी पढ़ें-सीएम">https://lagatar.in/jharkhand-news-khunti-district-administration-will-provide-government-accommodation-to-constable-mukti-purti-on-the-instructions-of-cm-hemant-soren/">सीएम

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मैथ्यू ने बताया  है कि  खोजे गए 5500 से ज्यादा नए RNA वायरसों को पांच नए फाइलम में डाला जा रहा है. ये टाराविरिकोटा (Taraviricota), पोमीविरिकोटा (Pomiviricota), पैराजेनोविरिकोटा (Paraxenoviricota), वामोविरिकोटा (Wamoviricota) और आर्कटिविरिकोटा (Arctiviricota) हैं. इसे भी पढ़ें-घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-akhara-procession-taken-out-from-kalachiti-bajrangbali-temple/">घाटशिला

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अध्यन के अनुसार टाराविरिकोटा (Taraviricota) सभी समुद्रों में मौजूद थे. जबकि, आर्कटिविरिकोटा (Arctiviricota) सिर्फ उत्तरी ध्रुव पर मौजूद आर्कटिक सागर में पाया गया. अब इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि प्राचीन जीन RdRp धरती पर कैसे आया. ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में इस अध्ययन का नेतृत्व  करने वाले वैज्ञानिक अहमद जायेद ने कहा कि RdRp एक बेहद प्राचीन जीन है. यह तब से मौजूद है जब डीएनए की शुरुआत हो रही थी. इस सम्य अन्य वायरसों की उत्पत्ति का इतिहास खंगाल जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि कौन सा वायरस कब आया. उससे कितना नुकसान या फायदा है.   [wpse_comments_template]    

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