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रिम्स : डेंटल के ट्यूटरों को पांच महीने से सैलरी नहीं, काम लेकर पैसे देने को राजी नहीं प्रबंधन

Ranchi : रिम्स डेंटल विभाग में कार्यरत 15 ट्यूटरों को 5 महीने से सैलरी नहीं दी गई है. ट्यूटरों ने बताया रिम्स प्रबंधन द्वारा उन्हें सैलरी देने के लिए एक शर्त रख दी गई है. शर्त ये है कि अगर कोर्ट में केस हार जाते हैं तो पूरे पैसे लौटाने होंगे. बता दें कि रिम्स में ट्यूटरों का अनुबंध दिसंबर में समाप्त हो गया था. मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ने स्थिति यथावत रहने का आदेश दिया. इसके बाद रिम्स प्रबंधन इनसे काम लेता रहा पर सैलरी नहीं दी और जब सैलरी देने को तैयार हुआ तो उन्होंने कहा कि अगर वे भविष्य में केस हार जाते हैं तो सारा पैसा उन्हें वापस करना पड़ेगा. इसको लेकर डेंटल विभाग के ट्यूटरों ने रिम्स निदेशक से मुलाकात की. पैसे के लिए जो शर्त तय है, उसी शर्त पर उन्हें भुगतान किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि डेंटल के ट्यूटरों का इस्तीफा भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. डेंटल में कार्यरत ट्यूटरों का कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि वे आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत छोड़ भी नहीं सकते और काम करने के बदले उन्हें पैसे मिलेंगे या नहीं यह भी नहीं पता.

ट्यूटरों ने कहा- ऐसा लग रहा जैसे चारों तरफ से फंस गए हैं

रिम्स डेंटल विभाग के ट्यूटरों ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है और वह बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं. उन्हें काम किसी भी हाल में करने होंगे पर छोड़ नहीं सकते और उसके बदले उन्हें पैसे का भुगतान भी नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि 5 महीने से वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति खराब हो गई है. कोरोना होने के बाद भी परिवार वालों के इलाज कराने में परेशानी हो रही है. हालात ऐसे हैं कि वे इस दौरान कोर्ट भी नहीं जा सकते.

डेंटल के ट्यूटरों की ड्यूटी आईसीयू में लगाई गयी

वहीं, मरीजों की जान से भी रिम्स प्रबंधन खेल रहा है. ट्रॉमा सेंटर में कोरोना के गंभीर मरीज भर्ती हैं. अधिकतर मरीज आईसीयू सपोर्ट पर हैं. ऐसे मरीजों की देखभाल के लिए रिम्स प्रबंधन ने दांत के डॉक्टरों को आईसीयू में ड्यूटी पर लगाया है. वह भी बिना किसी ट्रेनिंग के. ऐसे में अगर कोई मरीज गंभीर हो जाता है तो कोई डेंटिस्ट कैसे उस परिस्थिति से निपट पाएगा. डेंटल विभाग के 15 ट्यूटर की ड्यूटी रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में लगाई गई है. डेंटल के ट्यूटरों का कहना है कि हमें किसी तरह की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई है. हम चाह कर भी मरीजों को बचा नहीं पाते हैं. हमारे सामने मरीज दम तोड़ देते हैं और हम बस डॉक्टर होने की एक्टिंग करते रह जाते हैं. जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है, उनमें से दो खुद संक्रमित हैं. उन्हें बार-बार ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए कहा जा रहा है.

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