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बैठक में देरी और वित्तीय फैसलों पर RIMS ने दी सफाई, निदेशक पर लगे आरोपों को बताया बेबुनियाद

राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) ने निदेशक पर लगे नियम उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी और बैठक न बुलाने जैसे आरोपों पर सफाई दी है. प्रशासन का कहना है कि निदेशक ने सभी कार्य रिम्स एक्ट और शासी परिषद की शक्तियों के अनुसार किए हैं. बैठक न होने और निर्णय में देरी का मुख्य कारण आचार संहिता और प्रशासनिक बाधाएं रही हैं.
 
रिम्स, RIMS
  • बैठक और बजट प्रबंधन पर RIMS ने दी सफाई

Ranchi :  राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) ने निदेशक पर लगे नियम उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी और बैठक न बुलाने जैसे आरोपों पर सफाई दी है. प्रशासन का कहना है कि निदेशक ने सभी कार्य रिम्स एक्ट और शासी परिषद की शक्तियों के अनुसार किए हैं. बैठक न होने और निर्णय में देरी का मुख्य कारण आचार संहिता और प्रशासनिक बाधाएं रही हैं.

 

वित्तीय मामलों में सीधे मंत्री तक फाइल भेजने के आरोप पर कहा गया कि रिम्स एक्ट और शासी परिषद की 58वीं बैठक में अध्यक्ष को 15 करोड़ और निदेशक को 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्ति दी गई है. इन्हीं प्रावधानों के तहत संचिकाएं (फाइल) भेजी जाती हैं और आकस्मिक हालात में बाद में स्वीकृति ली जाती है.

 

बैठक न बुलाने के आरोप पर सफाई दी कि निदेशक के योगदान के तुरंत बाद फरवरी 2024 में बैठक प्रस्तावित की गई थी, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी. बाद में 9 जुलाई 2024 और 15 अप्रैल 2025 को बैठक हुई.

 

बजट प्रबंधन पर प्रशासन ने कहा कि निदेशक ने पिछले वर्ष की तुलना में 12% अधिक व्यय किया. वहीं 783 करोड़ रुपये की रिम्स पुनर्विकास योजना पर सरकार कार्य कर रही है, जिसकी निकासी सिविल सर्जन रांची के माध्यम से की जा रही है.

 

मानव संसाधन की कमी पर प्रबंधन ने बताया कि 2011 में 1100 बेड और 1326 पद थे. जबकि अब 2173 बेड हैं. लेकिन पदों में वृद्धि नहीं हुई है. 326 नए पदों का प्रस्ताव तीन साल से विभाग में लंबित है.

 

प्रशासन का कहना है कि कार्यप्रणाली वर्षों से समान रही है. ऐसे में केवल वर्तमान निदेशक पर आरोप लगाना रिम्स और सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश है.

 

 

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