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रिम्स : स्थापना के दो साल बाद भी नहीं शुरू हो सका किडनी ट्रांसप्लांट

  • जुलाई 2021 में हुई थी स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन स्थापित
  • स्वास्थ्य मंत्रालय में लंबित है मामला
Ranchi : झारखंड में किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था शुरू हो जाती, तो यहां के मरीजों को दूसरे प्रदेशों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ता. इसी सोच के साथ जुलाई 2021 में रिम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की स्थापना तो जरूर हुई, लेकिन नहीं शुरू हो सकी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा. इस बीच में रिम्स के दो निदेशक भी बदल चुके हैं. वहीं अब प्रभारी निदेशक डॉ आरके गुप्ता इसकी शुरुआत को लेकर प्रयास कर रहे हैं.

मामला कागजों में उलझ कर रह गया

बता दें कि रिम्स के निदेशक रहे डॉ डीके सिंह ने नेफ्रोलॉजी विभाग की शुरुआत की थी. इसी दौरान उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की भी बात कही थी. प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन मामला कागजों में उलझ कर रह गया. वहीं डॉ कामेश्वर प्रसाद जब रिम्स के निदेशक बने, तो उनके कार्यकाल में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच एमओयू भी हो गया, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका. रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजीव रंजन ने कहा कि रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर जो प्रक्रिया है, वो स्वास्थ्य मंत्रालय में लंबित है.

हर रोज नेफ्रोलॉजी विभाग के ओपीडी में 30 से 40 मरीज लेते हैं परामर्श

रिम्स में किडनी विभाग शुरू हुए तीन साल पूरे हो गए. विभाग की हेड डॉ. प्रज्ञा पंत घोष की देखरेख में विभाग का संचालन भी हो रहा है. हर रोज नेफ्रोलॉजी विभाग के ओपीडी में 30 से 40 मरीज चिकित्सीय परामर्श ले रहे हैं. लेकिन जिस विभाग में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की बात थी, वो नहीं हो सकी. इधर, किडनी की समस्या से ग्रसित मरीजों का इलाज रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती कर किया जाता है. इसे भी पढ़ें – साई">https://lagatar.in/jharkhand-wrestler-amit-gope-selected-for-sais-foreign-exposure-tour/">साई

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