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आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा, हिंदू समाज की पराजय हमेशा आपसी फूट की वजह से हुई

 Mathura :  आरएसएस के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लगातार देश भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.  इस क्रम में आज मथुरा में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत शामिल हुए.

 

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि हिंदू समाज कभी किसी की वीरता, शौर्य या बल के कारण पराजित नहीं हुआ, बल्कि जब भी उसकी पराजय हुई, आपसी फूट की वजह से हुई.

 

आरएसएस चीफ ने इस अवसर पर  भेदभाव-मुक्त भारत की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, हिंदू समाज की ताकत उसकी एकता और भक्ति में निहित है.  मोहन भागवत ने कहा, हिंदू समाज एक है, लेकिन दुनिया उसे भाषा, जाति और पंथ-संप्रदायों के आधार पर अलग-अलग रूपों में देखती है.

 

उन्होंने सलाह दी कि ऐसे नजरिए में  हिंदू  समाज के अंतर्गत  आने वाले सभी लोगों के बीच मित्रता और पारिवारिक संबंध होने चाहिए. श्री भागवत ने साथ में आने-जाने, उठने-बैठने, खाने-पीने और सुख-दुख में भागीदारी को सामाजिक एकता का आधार करार दिया.

 

देश में वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में मोहन भागवत ने कहा कि हालात देखकर डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन  सच है कि ऐसी परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं. उन्होंने याद दिलाया कि  हिंदू समाज ने सुल्तानों और बादशाहों के शासन काल में लगभग 500 साल तक जीवन बिताया.

 

आरएसएस चीफ ने कहा कि अगर समाज(हिंदू) का नाश होना होता तो वह उसी समय हो गया होता. लेकिन हिंदू समाज बचा रहा. आज यह देश फिर एक हिंदुओं के देश के रूप में आगे बढ़ रहा है. मोहन भागवत ने कहा कि अत्याचारों के दौर में भी हिंदू समाज ने अपना धर्म  बचाये रखा,

 

भले ही इसके लिए बलिदान देना पड़ा. कहा कि आज उसी सनातन धर्म का संदेश संतों के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल रहा है.  उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सनातन और हिंदू समाज एक होता चला जायेगा, वैसे-वैसे आसुरी शक्तियां कमजोर होती चली जायेंगी.

 

उनका पराभव होता चला जायेगा. आरएसएस चीफ ने दावा किया कि पिछले 50 वर्षों में हिंदू समाज जितना एकजुट हुआ है, उतना ही समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का विघटन हुआ है.  

 

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