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Jharkhand News : बालू घाट आवंटन के नियम बदले, अब ग्रामसभा की सहमति के बाद होगा लीज एग्रीमेंट

  • सरकार ने झारखंड सैंड माइनिंग (संशोधन) नियमावली-2026 की जारी
  • भुगतान व्यवस्था से लेकर मासिक रिपोर्ट तक नए प्रावधान लागू

Ranchi :  हेमंत सरकार आम जनता को बालू उपलब्ध कराने को लेकर काफी संजीदगी से काम कर रही है. झारखंड में अब तक 16 जिलों के 229 बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. लेकिन जिला स्तर पर लीज डीड की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है.

 

राज्य के कुल 444 बालू घाटों में से 298 की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष घाटों की प्रक्रिया जारी है. इस बीच राज्य के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने बालू खनन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए झारखंड सैंड माइनिंग (संशोधन) नियमावली, 2026 की अधिसूचना जारी की है.

 

नई नियमावली में लीज डीड, भुगतान प्रणाली, ग्रामसभा की सहमति, पर्यावरणीय जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं. अधिसूचना के अनुसार, अब लीज की अवधि की गणना पंजीकरण की तारीख से की जाएगी.

 

किस्तों में होगा भुगतान

नई नियमावली के अनुसार,  भुगतान व्यवस्था को भी चरणबद्ध किया गया है. लीजधारकों को अब भुगतान तीन किस्तों में करना होगा. पहली किस्त 50 प्रतिशत होगी, जो पहले वर्ष में परमिट जारी होने से पहले देनी होगी. दूसरे और आगामी वर्षों में यह भुगतान वर्ष की पहली तिमाही में देना होगा.

 

दूसरी किस्त 25 प्रतिशत तीसरी तिमाही में और तीसरी किस्त 25 प्रतिशत चौथी तिमाही में जमा करनी होगी. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूसरे वर्ष और उसके बाद की अवधि में बोली राशि पिछले वित्तीय वर्ष के वार्षिक मिनरल कंसेशनल वैल्यू का 110 प्रतिशत होगी.

 

ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य

संशोधित नियमों में अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है. नियमावली के अनुसार, अब लीज डीड निष्पादन से पहले संबंधित ग्रामसभा की सहमति लेना अनिवार्य होगा. यह प्रावधान पेसा कानून और झारखंड पंचायत नियमों के तहत लागू किया गया है.

 


टैक्स और शुल्क अलग से देना होगा

नई अधिसूचना के तहत, रॉयल्टी के अलावा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), पर्यावरण उपकर, प्रबंधन शुल्क, GST, स्टांप शुल्क और समेत अन्य देय राशि भी लागू कानूनों के तहत अलग से देनी होगी.

 

मासिक रिटर्न नहीं देने पर लगेगा जुर्माना

सरकार ने बालू घाट संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मासिक रिटर्न जमा करना अनिवार्य कर दिया है. लीजधारकों को हर माह की रिपोर्ट अगले महीने की 10 तारीख तक जमा करनी होगी. रिपोर्ट जमा नहीं करने पर प्रतिदिन 25 रुपये का जुर्माना लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 2500 रुपये तय की गई है.

 

लीजधारकों की जिम्मेदारियां भी तय

नई लीज शर्तों में पर्यावरण संरक्षण, दुर्घटना की सूचना, मुआवजा भुगतान और नियमों के पालन को लेकर लीजधारकों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं. लीजधारी को पेड़ लगाने, प्रदूषण नियंत्रण उपाय करने और किसी भी दुर्घटना की सूचना तत्काल उपायुक्त को देनी होगी. इसके अलावा सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर वह लीज क्षेत्र में सड़क, मार्ग या अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए प्रवेश कर सकेगी.

 

5 वर्षों के लिए होगी लीज

नई लीज डीड के प्रारूप में यह भी उल्लेख किया गया है कि बालू खनन लीज 5 वर्षों की अवधि के लिए दी जाएगी. यह अवधि लीज डीड के पंजीकरण की तारीख से प्रभावी होगी.

 

विवाद की स्थिति में संबंधित जिले की अदालत में होगी सुनवाई

लीज डीड में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी विवाद की स्थिति में मामला संबंधित जिले की सिविल अदालत में ही दायर किया जाएगा.

 

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