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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच एस जयशंकर ने ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजेद से मुलाकात की

दूतावास में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में शोक सभा का आयोजन किया गया था. मिसरी ने शोक संवेदना रजिस्टर पर हस्ताक्षर किये.
 
  • खातिबजेद ने IRIS डेना को डुबाये जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया
  • गुरुवार को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अराघची से फोन पर बात की थी
  • ट्रंप न्यूयॉर्क का मेयर नहीं चुन सकते, वे ईरान का सुप्रीम लीडर चुनना चाहते हैं.
  • विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शोक संवेदना रजिस्टर पर हस्ताक्षर किये

New Delhi : ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच खबर आयी है कि पिछले 24 घंटे में कम से कम तीन बार ईरान और भारत के डिप्लोमैट्स की मुलाकात हुई है.

 

आज शुक्रवार को रायसीना डॉयलोग के दौरान नयी दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजेद से मुलाकात की. हालांकि दोनों के बीच क्या चर्चा हुई. इसकी कोई खास जानकारी सामने नहीं आयी है.

 

 

 


इससे पूर्व कल गुरुवार को एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की थी. इसके अलावा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी नयी दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी. 


दरअसल दूतावास में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में शोक सभा का आयोजन किया गया था. मिसरी ने शोक संवेदना रजिस्टर पर हस्ताक्षर किये. 

 
ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजेद यहां पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर के चयन को लेकर ट्रंप प्रशासन पर तंज कसा, उन्होंने कहा, ट्रंप न्यूयॉर्क का मेयर नहीं चुन सकते, वे ईरान का सुप्रीम लीडर चुनना चाहते हैं.


खातिबजेद ने पूछा, क्या आप इस कॉलोनियल अप्रोच की कल्पना कर सकते हैं? जबकि वे अपने देश में डेमोक्रेसी देखना चाहते हैं. क्या वे ईरान के डेमोक्रेटिक तरीके से चुने गये प्रेसिडेंट को हटाना चाहेंगे.


इस क्रम में खातिबजेद ने IRIS डेना के हिंद महासागर में डुबाये जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया, कहा कि जहाज पर कोई हथियार नहीं थे. अभ्यास में हिस्सा लेने आये कई युवा ईरानी नौसैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.


जान लें कि भारत ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे जंग में न्यूट्रल है. ईरान ने जब यूएई और सऊदी जैसे देशों पर हमला किया, तो पीएम मोदी ने वहां के राष्ट्राध्यक्षों से बात की थी.


श्री मोदी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, सैन्य संघर्ष से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. कहा कि भारत कानून का राज, बातचीत और कूटनीति में विश्वास करता है. पीएम मोदी ने यह बयान फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया.

 


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