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साहिबगंज स्टोन माइंस मालिक ने ईडी को बताया : पंकज मिश्रा ने माइनिंग इजाजत के लिए 15 लाख की उगाही की

 
Ranchi: झारखंड में अवैध खनन मामले की जांच ईडी कर रही है. जांच के क्रम में एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं. इसी दौरान एक और खुलासा हुआ है. स्टोन क्रेशर के मालिक और साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन के मुख्य गवाह विनोद कुमार ने ईडी को बताया है कि पंकज मिश्रा ने खनन व्यवसाय की अनुमति देने के लिए 15 लाख रुपये की उगाही की थी. उसने एजेंसी को बताया कि, "लेकिन पैसे लेने के बाद भी पंकज ने उसे कारोबार नहीं करने दिया और पैसे वापस नहीं किए". यहां बता दें कि पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि और झामुमो के वरिष्ठ पदाधिकारी भी हैं. इसे भी पढ़ेें - PFI">https://lagatar.in/amit-shah-holds-high-level-meeting-with-nsa-home-secretary-dg-nia-regarding-raids-on-pfi-locations/">PFI

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झामुमो पदाधिकारी के माध्यम से नकद भुगतान किया था

विनोद कुमार ने बताया कि, उसने अलग-अलग व्यक्तियों से पैसे उधार लिए थे और उन्होंने एक स्थानीय झामुमो पदाधिकारी के माध्यम से नकद भुगतान किया.  जो स्थानीय झामुमो सांसद विजय हांसदा का करीबी है. लेकिन 15 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद वह अपनी स्टोन क्रेशर इकाई को फिर से चालू नहीं कर सका. जब उन्होंने स्थानीय पदाधिकारी से पंकज मिश्रा को पैसे वापस करने के लिए कहने की मांग की, तो उन्हें धमकी दी गई. पंकज मिश्रा ने अपने पट्टे के पत्थर खनन क्षेत्र पर भी कब्जा कर लिया और वहां भी अवैध खनन को अंजाम दिया. विनोद ने ये भी बताया कि पंकज मिश्रा इतने शक्तिशाली हैं कि आज भी उन्हें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से खनन और कोल्हू चलाने का लाइसेंस नहीं मिल पा रहा है.

स्टोन क्रशर इकाई को बंद कर दिया

कहा जाता है कि गवाह ने ईडी को बताया कि चूंकि वह अवज्ञाकारी रहा, इसलिए पंकज मिश्रा ने जिला प्रशासन और खनन विभाग की मदद से अपनी स्टोन क्रेशर इकाई को बंद कर दिया. भुगतान 2020 में किया गया था. पता चला है कि गवाह ने ईडी को कुछ सबूत सौंपे भी थे और कहा था कि कई और भी सबूत उसके पास मौजूद हैं. 1000 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध खनन की जांच के दौरान, ईडी ने पंकज मिश्रा की 42 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता लगाया, जो अपराध की आय से जुटाई गई थी. ईडी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्थानीय प्रतिनिधि होने के नाते पंकज मिश्रा का राजनीतिक दबदबा था. वह अपने सहयोगियों के माध्यम से साहिबगंज और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन व्यवसायों के साथ-साथ अंतर्देशीय नौका सेवाओं को नियंत्रित करता है. साहिबगंज में विभिन्न खनन स्थलों पर स्थापित कई क्रशरों की स्थापना और संचालन के साथ-साथ पत्थर के चिप्स और बोल्डर के खनन पर भी उनका बहुत अधिक नियंत्रण है. इसे भी पढ़ें -आरएसएस">https://lagatar.in/rss-chief-mohan-bhagwat-reached-delhi-mosque-met-imam-and-muslim-leaders/">आरएसएस

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