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संभल हिंसा : CO अनुज कुमार चौधरी पर FIR दर्ज करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक

हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 24 फरवरी को होगी. यह मामला यामीन नाम के शख्स की शिकायत से जुड़ा हुआ है, उन्होंने तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर के समक्ष एक अर्जी दायर की थी.सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अर्जी स्वीकार कर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था.
 

Lucknow :  इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आज मंगलवार को संभल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी गयी है, जिसमें संभल के तत्कालीन CO अनुज कुमार चौधरी सहित कई पुलिसवालों के खिलाफ भीड़ पर गोली चलाने के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया था.

 

हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 24 फरवरी को होगी. यह मामला यामीन नाम के शख्स की शिकायत से जुड़ा हुआ है, उन्होंने तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर के समक्ष एक अर्जी दायर की थी.सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अर्जी स्वीकार कर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था.  


 
यामीन ने आरोप लगाया था कि 24 नवंबर, 2024 को सुबह 8.45 बजे उनका बेटा आलम  संभल के मोहल्ला कोट में जामा मस्जिद के पास ठेले पर पपीते और बिस्कुट बेच रहा था, तभी कुछ पुलिसवालों ने भीड़ पर फायरिंग कर दी.   

 

यामीन की याचिका में संभल थाने के इंचार्ज अनुज कुमार तोमर सहित अनुज चौधरी का नाम था.सुनवाई के बाद सीजेएम विभांशु सुधीर ने 11 पेज के आदेश में लिखा कि पुलिस क्रिमिनल कामों के लिए ऑफिशियल ड्यूटी की आड़ नहीं ले सकती. इस फैसले के एक सप्ताह बाद सीजेएम विभांशु सुधीर का ट्रांसफर कर दिया गया था.


 
इस केस  की इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार और मंगलवार को सुनवाई हुई. एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) मनीष गोयल ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट(विभांशु सुधीर) ने कानून के तहत जरूरी सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज कर बीएनएसएस की सीमाओं को पार किया.

 

राज्य और पुलिस अधिकारी की ओर से गोयल ने कहा कि यह ऑर्डर कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं है, क्योंकि सीजेएम ने FIR का आदेश देने के लिए सेक्शन 175 BNSS के तहत शक्तियों का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्होंने प्रोविजन में सख्त प्रोसीजरल सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया.    यह सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बनाये गये हैं.


 

 

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