Search

समीर उरांव, सुखदेव भगत और चमरा लिंडा की रणनीति का होगा लिटमस टेस्ट

Praveen Kumar Ranchi : लोहरदगा लोकसभा चुनाव इस बार भी दिलचस्प होनेवाला है. त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस की टेंशन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे चमरा लिंडा ने बढ़ा दी है. एक तरफ जहां भाजपा प्रत्याशी समीर उरांव इस क्षेत्र में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वहीं सुखदेव भगत भी अपना समीकरण बनाने की जुगड़ा में लगे हैं. समीर उरांव के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के दौरे का लाभ यह रहा कि यहां का हर भाजपा नेता प्रत्याशी समीर उरांव के साथ पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतर गये हैं. 2019 के चुनाव में लोहरदगा लोकसभा सीट से सुदर्शन भगत को 371595 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव भगत को 361232 वोट मिले थे. इस चुनाव में सुदर्शन भगत ने करीब 10363 वोटों से जीत हासिल की थी. ये बेहद करीबी मुकाबला था. इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या लोकसभा सीट पर भाजपा का जनाधार कम हो रहा है. सुखदेव भगत को एक ओर चमरा लिंडा के चुनाव मैदान में उतरने से टेंशन है तो दूसरी ओर उन्हें रामेश्वर उरांव और बंधु तिर्की खेमे के नेताओं-कार्यकर्ताओं का खुल कर समर्थन प्राप्त नहीं हो पा रहा है. दोनों नेता ऊपर-ऊपर सुखदेव भगत के पक्ष में दिख रहे हैं, लेकिन अंदरखाने इनका मन अभी नहीं मिला है. राजनीतिक जानकार कहते हैं कि चमरा लिंडा के चुनाव मैदान में उतरने से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा. वहीं भाजपा को भी सरना वोटरों के बंटवारे का डर है. लोहरदगा लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा का राज रहा है. लोहरदगा सीट के लिए अब तक हुए 16 बार के चुनाव में से सात बार कांग्रेस, छह बार भाजपा, एक-एक बार झारखंड पार्टी, निर्दलीय और जनता पार्टी के सांसद रहे हैं. 2019 के चुनाव में भाजपा के सुदर्शन भगत ने लोहरदगा से जीत की हैट्रिक लगायी थी.

पलायन लोहरदगा की मुख्य समस्या

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं है. रोजगार और कारोबार की स्थिति दयनीय है. यहां वास्तविक स्थिति पलायन की है. लोग रोजगार की आस में लोहरदगा से बाहर जा रहे हैं.

कांग्रेस की परेशानी बढ़ा सकते हैं चमरा

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुखदेव भगत को सिसई और लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र के कुछ बूथों पर काफी बढ़त मिली थी. वहीं भाजपा उम्मीदवार को विशुनपुर और लोहरदगा विधानसभा सीट के कुछ बूथों पर बढ़त मिली थी. वहीं मांडर विधानसभा में भी भाजपा उम्मीदवार को बढ़त मिली थी. अगर चमरा लिंडा नाम वापस नहीं लेते हैं तो कांग्रेस की परेशानी बढ़ सकती है. विशुनपुर में पहले से ही कांग्रेस कमजोर है और चमरा के मैदान में आने से वहां कांग्रेस लगभग शून्य तक पहुंच सकती है. भाजपा में शामिल होने और फिर वापस कांग्रेस में आने से सुखदेव भगत की छवि भी बदली है. उनकी लोकप्रियता में भी कमी आयी है. लोगों में एक मैसेज गया कि वह टिकट के लिए पार्टी बदलते हैं. समीर उरांव को भी केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है. वर्तमान में आदिवासी समाज एकमत नहीं होकर तीन गुटों में बंटा है. एक गुट भाजपा के साथ, दूसरा गुट कांग्रेस के साथ और तीसरा गुट चमरा लिंडा के साथ है.

चमरा लिंडा किसके लिए होंगे फायदेमंद 

राजनीति के जानकारों की मानें, तो जब-जब चमरा लिंडा चुनावी मैदान में उतरे हैं, कांग्रेस को ही उन्होंने नुकसान पहुंचाया है. अगर ऐसा होता है, तो यह भाजपा के लिए सुकून की बात होगी.

2019 के लोकसभा चुनाव में किस विधानसभा में किसको कितना मिला था वोट

विधानसभा          भाजपा            कांग्रेस विशुनपुर                73255          59946 सिसई                   61504          71978 मांडर                   91442          90254 गुमला                  62628          69313 लोहरदगा             80698         68577 पोस्टल वोट          2068            1164 इसे भी पढ़ें : रिपोर्टः">https://lagatar.in/report-jharkhand-bihar-chhattisgarh-bengal-and-mp-are-the-poorest-states-in-the-country/">रिपोर्टः

झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, बंगाल और एमपी देश में सबसे गरीब राज्य
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp