भारत सरकार के श्रम कल्याण उप महानिदेशक के पद पर सेवा देने वाली झारखंड की पहली और देश की हैं दूसरी महिला ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रजिस्ट्रेशन कराने की कर रहीं अपील Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग की बेटी संध्या नंदी इन दिनों देश के असंगठित मजदूरों के उत्थान और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. साथ ही वह असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से अपील कर रही हैं कि अपना रजिस्ट्रेशन ई-श्रम पोर्टल में अवश्य कराएं. अगर रजिस्ट्रेशन होगा, तो उन्हें कई तरह के लाभ भी मिलेंगे. भारत सरकार के श्रम कल्याण के उप महानिदेशक के पद पर सेवा देने वाली यह झारखंड की पहली और देश की दूसरी महिला हैं. हजारीबाग के संत किरण हाई स्कूल से प्रारंभिक और संत कोलंबा कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने रांची के एक्सआईएसएस से एमबीए किया. उसके बाद यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर देश को सेवा दे रही हैं. इसे भी पढ़ें :किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-police-arrested-three-plfi-naxalites-with-weapons-from-anandapur-police-station-area/">किरीबुरू
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भारत सरकार के श्रम पोर्टल में 28.5 करोड़ असंगठित मजदूरों का रजिस्ट्रेशन
हजारीबाग आयीं संध्या नंदी बताती हैं कि संगठित क्षेत्र में मजदूरों की स्थिति बेहतर है. लेकिन असंगठित क्षेत्र में इनकी स्थिति पहले ठीक नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है. वर्तमान समय में भारत सरकार के श्रम पोर्टल में 28.5 करोड़ असंगठित मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है. इनमें 389 ऐसे क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं, जहां असंगठित मजदूर काम कर रहे हैं. उनलोगों ने यह कोशिश की है कि सबसे पहले असंगठित मजदूरों का डेटाबेस तैयार किया जाए ताकि उन्हें चिन्हित किया जा सके. ब्रिटिश जमाने में जो कानून बनाए गए थे, उनमें अब संशोधन किया जा रहा है. इसमें सामाजिक सुरक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. असंगठित मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा के तहत पढ़ाई, स्वास्थ्य और आवास के क्षेत्र में वे लोग काम कर रहे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग स्कीम भी बनाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि सामाजिक सुरक्षा पर ज्यादा से ज्यादा काम हो सके.बीड़ी पत्ता काम में लगी महिलाओं के बच्चे जाएं स्कूल
संध्या नदी कहती हैं कि देश के मजदूरों के लिए तो काम कर ही रही हैं, लेकिन हजारीबाग और झारखंड के मजदूरों पर उनका विशेष आकर्षण है. वह चाहती हैं कि बीड़ी पत्ता में जो महिला मजदूर काम करती हैं, वह अपने साथ अपने बच्चों को भी लगा देती हैं, जो गलत है. वह चाहती हैं कि बच्चों को स्कूल भेजा जाए. इसके लिए भी विशेष रूप से काम किया जा रहा है. चूंकि ऐसा मामला झारखंड के चतरा में अधिक पाए जाते हैं. वहीं महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ने के लिए भी पूरे देश भर में काम किया जा रहा है. अधिकांश अभ्रक खदान तो बंद हो चुके हैं. कुछ खदानें चल रही हैं. इनमें असंगठित मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए विशेष काम किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें :कानून">https://lagatar.in/incidents-of-mob-lynching-are-not-stopping-even-after-the-law-came-10-people-were-brutally-beaten-to-death-in-a-year/">कानूनआने के बाद भी नहीं रुक रही मॉब लिंचिंग की घटनाएं, सालभर में 10 लोगों की बेरहमी से पीटकर हत्या
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