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रामगढ़ जिले में सरहुल की धूम, मांदर की थाप पर जमकर थिरके लोग

बरकाकाना क्षेत्र के पीरी, सिधवारकला, सिउर, कंडेर, तेलियातू, मसमोहना, सीआईसी बस्ती, घुटूवा, डुड़गी, हेहल, छोटकाकाना, बुजुर्ग जमीरा, पोचरा, उरलुंग, पाहनबेड़ा समेत अन्य गांवों सरहुल पर्व की धूम रही. आदिवासी समाज के लोग मांदर की थाप पर नाचते-गाते नजर आए.
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Ramgarh : रामगढ़ जिले में शनिवार को प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया. आदिवासी समाज के लोगों ने सरना स्थलों पर पूजा-अर्चना की और मांदर की थाप पर जमकर नृत्य किया. बरकाकाना क्षेत्र के पीरी, सिधवारकला, सिउर, कंडेर, तेलियातू, मसमोहना, सीआईसी बस्ती, घुटूवा, डुड़गी, हेहल, छोटकाकाना, बुजुर्ग जमीरा, पोचरा, उरलुंग, पाहनबेड़ा समेत अन्य गांवों सरहुल पर्व की धूम रही. आदिवासी समाज के लोग मांदर की थाप पर नाचते-गाते नजर आए.


पीरी स्थित कार्यक्रम स्थल पर उप मुखिया सीमा देवी, विजय बेदिया, काशीनाथ बेदिया, सरजू बेदिया, तृतियाल बेदिया, सुभाष बेदिया, अधिवक्ता शंकर बेदिया, प्रदीप करमाली, सोहन बेदिया, गोपी बेदिया, देवकी बेदिया, संजय मुंडा, हिमालय बेदिया, देवराज बेदिया, कामेश्वर बेदिया, विजय बेदिया सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे. लोगों ने कहा कि सरहुल झारखंड का प्रमुख पर्व है. यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है. आदिवासियों की पहचान उनकी सभ्यता-संस्कृति व प्रकृति से जुड़ी है.

 


विजय बेदिया ने कहा कि वर्तमान समय में हम प्रकृति से कटते जा रहे हैं. प्रकृति प्रेम का प्रतीक सरहुल मानव व प्रकृति के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है. साथ ही लोगों को पर्यावरण की रक्षा करने के लिए प्रेरित भी करता है.


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