- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 211 अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन पर निर्णय नहीं
- फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
- झारखंड सरकार की उदासीनता पर उठे सवाल
Ranchi : झारखंड में अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन और नियमितीकरण का मामला एक बार फिर चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय नहीं लिए जाने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
शिक्षकों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकार इस मामले में उदासीन रवैया अपना रही है, जबकि उनका भविष्य लगातार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. (सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका (सिविल) संख्या 132/2016 के मामले में झारखंड सरकार को 211 अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन के संबंध में दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था. यह समयसीमा 4 अक्टूबर को ही समाप्त हो चुकी है. लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
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JTET की अनिवार्यता को लेकर भी उठे सवाल
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि उनके समायोजन पर निर्णय लेते समय भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त निर्धारित व्यावसायिक योग्यता को आधार बनाया जाए. शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति और योग्यता से जुड़े मामले में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की अनिवार्यता को आधार बनाकर निर्णय टालना उनके हितों के विपरीत है.
शिक्षकों का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर इस मामले में निर्णय लेना था. इसके बावजूद ठोस कारवाई नहीं होने से न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
211 विशेष शिक्षकों के भविष्य पर संकट
झारखंड में वर्षों से सेवाएं दे रहे 211 अनुबंधित विशेष शिक्षक अब सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद समायोजन की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक असुरक्षा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस अनिश्चितता का असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है.
निर्णय नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे विशेष शिक्षक
विशेष शिक्षकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए बिना किसी अनावश्यक देरी के समायोजन पर निर्णय लिया जाए और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए. उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
शिक्षकों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर अवमानना याचिका दायर करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है. अब यह देखना होगा कि क्या राज्य सरकार 211 विशेष शिक्षकों के भविष्य पर निर्णय लेती है या फिर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए शिक्षक दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं.

