Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर पशु तस्करी के आरोप में बर्खास्त बीएसएफ के सब इंस्पेक्टर भागिरथी प्रसाद के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है.
इस अधिकारी को बीएसएफ के विशेष कोर्ट ने छह महीने की सजा दी थी. साथ ही बर्खास्त कर दिया था. भागिरथी प्रसाद ने बर्खास्तगी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसकी सुनवाई न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायाधीश प्रसन्ना वी बराले की पीठ में हुई.
न्यायालय ने यह कहते हुए बर्खास्तगी मामले में हस्तक्षेप करने इनकार कर दिया कि सीमा पर काम करने वाले अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने के मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता है. क्योंकि सीमाएं देश की सुरक्षा से जुड़ी है.
हालांकि न्यायालय ने बीएसएफ अधिकारी द्वारा पेंशन मुद्दे पर दी गई दलील मामले में उसे सक्षम पदाधिकारी के समक्ष आवेदन देने का निर्देश दिया. भागिरथी ने यह दलील दी थी कि उसने 36 साल बीएसएफ में सेवा की है. बर्खास्तगी आदेश से वह पेंशन से वंचित हो जायेगा. उसके द्वारा किये गये नियमों के उल्लंघन के मुकाबले उसे दिया गया दंड बहुत ज्यादा होगा.
उल्लेखनीय है कि भागिरथी प्रसाद के खिलाफ यह आरोप लगा था कि भारत-बांग्लादेश सीमा के गेट नंबर 16 पर कमांडर के रूप में पदस्थापन के दौरान इस अधिकारी ने निजी स्वार्थ के लिए पशु तस्करी में शामिल था.
इन आरोपों के मद्देनजर बीएसएफ के विशेष कोर्ट में इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई. इसमें उसे दोषी करार देते हुए छह महीने की सजा सुनायी थी और नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश दिया था.
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