Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य जाति के उम्मीदवार निखिल कुमार पुनिया और एकता द्वारा NEET-PG में एडमिशन के लिए बौधिस्ट बनने के मामले में हरियाणा सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है. साथ ही धर्म परिवर्तन के इस मामले को अल्पसंख्यक समुदाय हक मारने के लिए की गयी धोखाधड़ी कहा है.
निखिल कुमार पुनिया और एकता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी थी. इस याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ में हुई. याचिका में यह कहा गया था कि इन दोनों ने बौध धर्म स्वीकार कर लिया है. इसलिए कोर्ट उन्हें उत्तर प्रदेश के Subharti Medical College में बौधिस्ट कोटे में एडमिशन लेने के लिए उचित आदेश पारित करे. दोनों ने बौध धर्म स्वीकार कर लिया है.
अनुमंडल अधिकारी ने इससे संबंधित प्रमाण पत्र भी जारी किया है. मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकादाता पुनिया जाति के हैं. पुनिया अनुसूचित जाति में या जाट में हो सकता है. न्यायालय द्वारा उठाये गये इस सवाल के जवाब में याचिकादाता की ओर से कहा गया कि वे जाट हैं.
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने यह जानना चाहा कि अगर आप जाट हैं तो फिर अल्पसंख्यक कैसे हो सकते हैं. न्यायालय के इस सवाल पर याचिकादाता की ओर से यह कहा गया कि उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है. वे सही में बौधिस्ट हो गये हैं. कोई भी आदमी बौध धर्म स्वीकार कर सकता है.
मुख्य न्यायाधीश ने इस जवाब पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह धोखाधड़ी का एक और तरीका है. आप लोग वास्तविक अल्पसंख्यक के अधिकार को छीनना चाहते हैं. आप सबसे अमीर और उच्च जाति से आते हैं. आपको अपनी योग्यता पर गर्व होना चाहिए. वंचित लोगों का अधिकार नहीं छीनना चाहिए. NEET-PG की परीक्षा में तो खुद को सामान्य जाति का सदस्य घोषित किया था. फिर बौध कैसे हो गये.
इसके बाद याचिकादाता की ओर से फिर कहा गया कि वे सच में बौध हो गये हैं. इसके बाद न्यायालय ने कहा कि तब तो हर कोई शुरू हो जायेगा. मुख्य न्यायाधीश ने चेतानवी देते हुए कहा कि हमें और टिप्पणी करने के लिए मजबूर नहीं करें. इसके बाद न्यायालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव को इस मामले में दो सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.
मुख्य सचिव को अपनी रिपोर्ट में यह बताना है कि अल्पसंख्यक जाति का प्रमाण पत्र जारी करने का क्या दिशा निर्देश है ? इसके अलावा उन्हें यह भी बताना है कि NEET-PG में सामान्य जाति घोषित करने के बाद क्या उसे बौध अल्पसंख्यक बनने की अनुमति दी जा सकती है. अगर नहीं दी जा सकती है तो SDO द्वारा बौध अल्पसंख्यक होने का प्रमाण जारी करने का क्या आधार था.
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