- हाईकोर्ट ने JNAC को 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का दिया था आदेश
Ranchi : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से चार याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता गंगा रीजेंसी, पटियाला विन्स बिल्डिंग सहित अन्य दो के निर्माणों के संबंध में फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है.
यह आदेश गंगा रीजेंसी एलएलपी बनाम राकेश कुमार झा एवं अन्य मामले में सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनीत सिन्हा और अधिवक्ता देवेश अजमानी ने पैरवी की.
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छूट संबंधी आवेदन स्वीकार किए. इस मामले में नोटिस भी जारी किया है. साथ ही संबंधित याचिकाओं को इससे जुड़े अन्य मामलों के साथ टैग करने का आदेश दिया है.
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दी दलीलें
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि झारखंड हाईकोर्ट ने तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.
लेकिन समिति द्वारा रिपोर्ट तैयार करने से पहले याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया. यदि उनके निर्माण हटाए जाते हैं तो इससे उन्हें गंभीर नुकसान होगा. क्योंकि बिना सुनवाई के उन्हें बेदखल किया जा सकता है.
याचिकाकर्ता पक्ष को पार्टी भी नहीं बनाया गया. याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे राकेश कुमार झा की जनहित याचिका में पक्षकार नहीं थे, फिर भी उनके खिलाफ आदेश पारित कर दिया गया.
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट द्वारा राकेश कुमार झा की जनहित याचिका में 14 और 28 जनवरी 2026 को पारित आदेशों को चुनौती दी गई थी.
यह मामला झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 14 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी को प्रतिवादियों के भवनों को तोड़ने का आदेश दिया गया था.
इसके बाद प्रतिवादियों द्वारा दायर आवेदनों को हाईकोर्ट ने 28 जनवरी और 29 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया था. इन सभी आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
हाईकोर्ट ने JNAC को अवैध निर्माण तोड़ने का दिया था आदेश
बता दें कि राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने जेएनएसी को सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश दिया था.
प्रतिवादियों ने हाई कोर्ट के 14 जनवरी 2026 के आदेश में संशोधन करने का आग्रह कोर्ट से किया था और भवनों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अवैध निर्माण किसी रूप में बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट का भी यही आदेश है. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की थी.
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