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हेमंत सरकार के कई नीतिगत फैसलों पर पेंच, कुछ को आपत्ति के बावजूद किया गया लागू तो कुछ के खिलाफ सड़क पर आंदोलन

Ranchi : प्रदेश की सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन सरकार के कई नीतिगत फैसलों पर सवाल उठ रहा है. सरकार के कुछ फैसले कोर्ट तक पहुंच गये हैं या पहुंचने की राह पर हैं. इसके अलावा कई फैसलों के विरोध में सड़क तक सरकार विरोधी आंदोलन की स्थिति बन चुकी है. इसमें कृषि उपज से जुड़े विधेयक और कोर्ट फीस में बढ़ोतरी शामिल है. इसके अलावा सरकार के एक फैसले पर तो आपत्ति भी उठी, लेकिन फिर भी उसे लागू किया गया. फैसला नियोजन नीति को लेकर था. नियोजन नीति का मामला आज हाईकोर्ट में लंबित है. पुरानी पेंशन योजना लागू करने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठा है. इसे भी पढ़ें - निलंबित">https://lagatar.in/suspended-ias-pooja-singhal-will-have-to-wait-for-bail-and-next-hearing-will-be-held-on-august-3/">निलंबित

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विधि विभाग की आपत्ति के बावजूद बनी नियोजन नीति

राज्य कैबिनेट द्वारा बीते साल 29 जुलाई को नयी नियोजन नीति नियमावली पारित की गयी थी. नियमावली को विधि सम्मत नहीं बताते हुए विधि विभाग ने इसपर आपत्ति दर्ज की थी. विधि विभाग ने नियमावली को संविधान के अनुच्छेद का उल्लंघन बताया था. कहा था कि यह नियमावली संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है. सरकार ने परामर्श की अनदेखी की और नियोजन नीति नियमावली को लागू कर दिया. स्थिति यह है कि नियमावली का मामला आज हाईकोर्ट में लंबित है.

कृषि उपज विधेयक वापस लेने की आलमगीर कर चुके हैं घोषणा

शीतकालीन सत्र-2021 में राज्य सरकार ने झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2022 को पारित कराया था. जिसपर राज्य के व्यापारियों ने आपत्ति दर्ज करायी थी. झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अधीन व्यापारियों ने सड़क तक आंदोलन किया, खाद्य पदार्थों की आपूर्ति तक को रोक दिया गया. बढ़ते आंदोलन को देख संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने नाराज व्यापारी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और इस विधेयक को वापस लेने का वादा किया. मॉनसून सत्र 2022 के पहले 29 जुलाई को हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक होगी. संभवतः विधेयक को दोबारा विधानसभा में पेश किये जाने को लेकर प्रस्ताव आने की संभावना है.

पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए मुख्य सचिव जता चुके हैं आपत्ति

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगामी 15 अगस्त से पुरानी पेँशन योजना को लागू करने की घोषणा कर चुके हैं. इस प्रस्ताव पर कैबिनेट में भी स्वीकृति मिल चुकी है. लेकिन योजना को लेकर मुख्य सचिव ने आपत्ति दर्ज की है. उन्होने कहा है कि योजना लागू करने से पहले सबसे बड़ी समस्या पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (पीएफआरडीएआई) में जमा 17,930 करोड़ रुपये वापस लेने की है, जो 2004 से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती की गई थी. जब तक यह राशि वापस नहीं होती है, तबतक योजना को धरातल पर उतारना मुश्किल होगा.

कोर्ट फीस में बढ़ोतरी के खिलाफ वकील भी सड़क पर आंदोलनरत

हेमंत सोरेन सरकार ने कोर्ट फीस में बढ़ोतरी को लेकर जो फैसला किया था, उसके खिलाफ राज्यभर के वकीलों ने आंदोलन शुरू कर दिया है. सोमवार को राज्यभर के 25,000 वकील न्यायिक कार्य से दूर रहे और सड़क पर उतरकर आंदोलन किया. बार काउंसिल ने कहा था कि राज्य सरकार की ओर से कोर्ट फीस बढ़ाया जाना अनुचित है. कोर्ट फीस में छह गुण तक बढ़ोतरी की गई है. जबतक सरकार इसे वापस नहीं लेगी, तबतक आंदोलन चलता रहेगा. इसे भी पढ़ें - BREAKING">https://lagatar.in/ranchi-yogendra-sao-and-nirmala-devi-acquitted-in-another-case-related-to-barkagaon-know-the-matter/">BREAKING

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