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PMLA पर SC का फैसला विपक्ष को रास नहीं आया, 17 दलों ने कहा, प्रतिशोध की राजनीति में लगी सरकार के हाथ और मजबूत होंगे

NewDelhi : धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED को मिले अधिकारों पर SC का फैसला राजनीतिक दलों को नागवार गुजरा है. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दलों ने ED को मिले अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई है. इन दलों का मानना है कि इससे सरकार(मोदी) के हाथ और मजबूत होंगे. कहा कि PMLA के तहत प्रवर्तन निदेशालय को मिले अधिकारों पर SC के फैसले से राजनीतिक प्रतिशोध में लगी सरकार के हाथ और मजबूत होंगे. बता दें कि इन दलों ने साझा बयान जारी कर उम्मीद जतायी है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय बहुत कम समय के लिए रहेगा. आगे संवैधानिक प्रावधानों की जीत होगी. इसे भी पढ़ें : कर्नाटक">https://lagatar.in/brainstorming-to-return-in-karnataka-rahul-gandhi-said-work-together-against-bjps-misrule-stay-united/">कर्नाटक

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17 दलों के नेताओं सहित कपिल सिब्बल ने हस्ताक्षर किये हैं

खबरों के अनुसार बयान पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), एमडीएमके, राष्ट्रीय जनता दल, रिवोल्यूशनरी सोशिल्स्ट पार्टी (आरएसपी) और शिवसेना समेत 17 दलों के नेताओं सहित निर्दलीय राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने हस्ताक्षर किये हैं. इसे भी पढ़ें :सुप्रीम">https://lagatar.in/supreme-courts-question-to-the-election-commission-and-the-central-government-tell-in-a-week-how-to-stop-free-gift/">सुप्रीम

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सर्वोच्च न्यायालय को स्वतंत्र फैसला देना चाहिए

इन दलों का दावा है कि इन संशोधनों ने उस सरकार के हाथ को मजबूत किया जो प्रतिशोध की राजनीति में लगी हुई है. आरोप लगाया कि यह सरकार इन संशोधनों का लाभ उठाते हुए अपने विरोधियों को दुर्भावनापूर्ण ढंग से निशाना बना रही है. विपक्षी दलों ने कहा, हम इस बात से निराश हैं कि सर्वोच्च न्यायालय, जिसे कानून में जांच-परख और संतुलन के अभाव को लेकर स्वतंत्र फैसला देना चाहिए, उसने वस्तुत: उन दलीलों को फिर से सामने कर दिया जो इन संशोधनों के समर्थन में कार्यपालिका की ओर से रखी गयी थीं.

संवैधानिक प्रावधानों की जीत होगी

कहा कि हम आशा करते हैं कि यह खतरनाक फैसला बहुत कम समय के लिए होगा और संवैधानिक प्रावधानों की जीत होगी. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिले अधिकारों का समर्थन करते हुए गत 27 जुलाई को कहा था कि धारा-19 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार, मनमानी नहीं है. न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सीटी. रवि कुमार की पीठ ने पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा था कि धारा-5 के तहत धनशोधन में संलिप्त लोगों की संपति कुर्क करना संवैधानिक रूप से वैध है. [wpse_comments_template]

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