Ranchi : झारखंड कैबिनेट की बैठक में सचिवालय सेवा के अधिकारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) नियमावली में संशोधन को मंजूरी देने पर झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है. सरकार के इस फैसले को लेकर संघ ने गहरा आक्रोश जताया है. संघ का सीधा आरोप है कि यह नीति सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ खुला भेदभाव है और उनकी प्रोन्नति को वर्षों तक बाधित करने की एक सुनियोजित पहल है.
संघ के अनुसार, पहले की व्यवस्था राज्य के सभी संवर्गों में प्रोन्नति की समय-सीमा में समानता लाने के लिए लागू की गई थी. अब इस नए संशोधन के बाद सचिवालय सेवा के अधिकारियों को लेवल-7 से लेवल-8 पर प्रोन्नति के लिए 8 वर्ष का लंबा इंतजार करना होगा. वहीं, दूसरी ओर, अन्य संवर्गों के अधिकारी इसी अवधि में सीधे उच्च पदों पर प्रोन्नत हो जाएंगे, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.
संघ ने सवाल उठाया कि वर्तमान में सचिवालय सेवा में अवर सचिव के 225 से अधिक पद खाली पड़े हैं. सामान्य नियम के तहत प्रशासनिक विभागों में पद रिक्त होने पर प्रोन्नति प्रक्रिया को सरल बनाया जाता है, लेकिन यहाँ इसे और कठिन कर दिया गया है.
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने चेतावनी दी है कि यह निर्णय राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करेगा. यदि सरकार ने इस फैसले पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया, तो वे अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और कार्मिक विभाग की होगी.
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