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सेंगेल का दुमका से राष्ट्रीय आदिवासी विद्रोह का शंखनाद

Dumka/Ranchi: सेंगेल अभियान द्वारा दुमका से राष्ट्रीय आदिवासी विद्रोह का उद्घोष रविवार को किया गया. यह आंदोलन झारखंड और देश के समग्र आदिवासियों का हासा, भाषा, जाति, धर्म, इज्जत, आबादी, रोजगार, प्रकृति को बचाने के लिए किया जा रहा है, ताकि आदिवासियों का संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन बचाया जा सके. सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सामखन मुर्मु ने कहा कि करो या मरो की तर्ज पर हर हाल में 2023 में सरना धर्म (प्रकृति धर्म) कोड को हासिल करना, झारखंड में संथाली भाषा को प्रथम राजभाषा बनाना, असम, अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को एसटी का दर्जा दिलाना, आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम में जनतांत्रिक एवं संवैधानिक सुधार लाना है. उन्होंने आदिवासी एकता और जन आंदोलन को बनाकर ईसाई धर्म गुरु और शिबू सोरेन के खिलाफ आवाज उठाना होगा. आदिवासियत की रक्षा में विफल दोनों के खिलाफ रविवार से विद्रोह का बिगुल फूंका जा रहा है. इसमें दोनों को बेनकाब किया जाएगा. इसे भी पढ़ें- झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-governments-decision-boiled-jain-society-demonstrated-on-the-road-know-what-is-the-whole-matter/">झारखंड

सरकार के फैसले से उबला जैन समाज, सड़क पर उतर किया प्रदर्शन, जान‍िये क्‍या है पूरा मामला

30 जनवरी से सेंगेल अभियान का आदिवासी जन आंदोलन की शुरुआत

- 30 जनवरी 2023- को पूर्व घोषित रेल रोड चक्का जाम के बदले सरना धर्म कोड प्राप्ति के लिए देशभर में धरना, प्रदर्शन और जुलूस निकाला जाएगा -फरवरी 2023 में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय सम्मेलन, दिल्ली में आयोजित होगा - 14 अप्रैल 2023 को रांची के मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रीय स्तर का आदिवासी एकता जनसभा का आयोजन होगा -30 जून 2023 - हूल दिवस से अनिश्चितकालीन आदिवासी असहयोग क्रांति- रेल रोड चक्का जाम, आर्थिक नाकेबंदी, भारत बंद बुलाया जाएगा. [wpse_comments_template]

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